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HC: अफसरों के टेबल पर अटकीं फाइलें औपचारिक बहाना, पुरानी पेंशन से जुड़े मामले में सरकार की अपील खारिज

Ranchi News: राज्य सरकार ने 26 नवंबर 2024 को पारित एक रिट आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी. इस आदेश में कुछ पूर्व कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशनरी लाभ देने का निर्देश दिया गया था. सरकार ने अपील दायर करने में हुई 243 दिन की देरी को माफ करने का आवेदन किया था.
 
झारखंड हाईकोर्ट
  • सरकारी विभागों को अपने काम में अधिक सतर्क और त्वरित होना चाहिए

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन योजना से जुड़े मामले में राज्य सरकार द्वारा 243 दिन देर से दायर लेटरल अपील (LPA) को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि सरकारी फाइलों का एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी या एक मेज से दूसरी मेज तक जाना, देरी को माफ कराने का “पर्याप्त कारण” नहीं हो सकता.

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राज्य सरकार ने 26 नवंबर 2024 को पारित एक रिट आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी. इस आदेश में कुछ पूर्व कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशनरी लाभ देने का निर्देश दिया गया था. सरकार ने अपील दायर करने में हुई 243 दिन की देरी को माफ करने का आवेदन किया था.

 

हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने देरी के लिए कोई ठोस और प्रमाणित कारण नहीं बताया. अपील में केवल फाइलों के विभिन्न अधिकारियों के पास जाने, वकीलों से राय लेने और अपील का मसौदा तैयार कराने जैसी सामान्य बातें कही गईं. कोर्ट ने इसे औपचारिक “बहाना” बताया, न कि देरी की वास्तविक व्याख्या.

 

कोर्ट ने कहा कि इस देरी का सीधा असर यह हुआ कि मूल याचिकाकर्ताओं में से एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, लेकिन वह रिट आदेश से मिलने वाले लाभ नहीं ले पाया. खंडपीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में देरी को माफ करना जीवित याचिकाकर्ताओं के अधिकारों के साथ अन्याय करेगा. सरकारी विभाग का यह तर्क कि उसकी मशीनरी बड़ी है और फाइलों में कई नोटिंग होती हैं, देरी माफ करने का आधार नहीं बन सकता.

 

कोर्ट ने कहा कि आज आधुनिक तकनीक उपलब्ध है, इसलिए सरकारी विभागों को अपने काम में अधिक सतर्क और त्वरित होना चाहिए. यदि कोई पक्ष अपनी लापरवाही या उदासीनता से देर करता है, तो “न्याय की दृष्टि से” देरी माफ नहीं की जा सकती.

 

खंडपीठ ने देरी माफ करने संबंधी आवेदन I.A. खारिज कर दिया. इसके बाद LPA भी खारिज कर दिया . इसके अलावा, मृत याचिकाकर्ता के कानूनी उत्तराधिकारियों को रिकॉर्ड में शामिल करने का आवेदन भी खारिज कर दिया गया. कोर्ट ने कहा कि उसने पहले ही समय दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने निर्धारित समय में कोई कार्रवाई नहीं की.

 

इस फैसले से रिट याचिका में दिए गए पुरानी पेंशन योजना के लाभ बरकरार रहेंगे. हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि मूल याचिकाकर्ताओं ने सीपीएफ योजना के तहत कोई राशि ली है, तो वह राशि सरकार को लौटानी होगी.

 

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