Ranchi: नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर खुले में शौच करने वालों से जुर्माना वसूल रहा है. निगम का कहना है कि खुले में शौच से शहर में गंदगी फैलती है और इसे रोकना जरूरी है. लेकिन जब इस मुद्दे पर आम लोगों से बात की गई, तो सबका एक ही सवाल है—अगर खुले में न जाएं, तो जाएं कहां?

लोगों का कहना है कि नगर निगम के जो सार्वजनिक शौचालय बने हैं, उनकी हालत बेहद खराब है. कहीं सफाई नहीं होती, कहीं पानी नहीं है. कई जगह दरवाजे टूटे हुए हैं और बदबू इतनी तेज है कि पास से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है. ऊपर से भीड़भाड़ वाले इलाकों में शौचालयों की संख्या भी न के बराबर है. ऐसे में जनता पूछ रही है—गलती हमारी है या व्यवस्था की?
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस पूरे मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. रांची में शौचालयों की कमी और खराब हालत को लेकर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया. तत्कालीन चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रांची नगर निगम से कहा था कि अब राजधानी में जो भी शौचालय बनाए जाएं, उनका साइज पहले से बड़ा हो और उनमें रोशनदान की सही व्यवस्था होनी चाहिए. साथ ही लोगों को शौचालय के इस्तेमाल को लेकर जागरूक करना भी जरूरी बताया गया.
नगर निगम का दावा
नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि शहर में 243 शौचालय बने हैं, जिनकी दिन में तीन बार सफाई होती है. शिकायत के लिए नंबर भी जारी किए गए हैं. नगर निगम का सफाई वाला दावा तो बिल्कुल गलत साबित होता है क्योंकि कोई भी शौचालय में सफाई नहीं दिखती. इनमें जाना तो दूर की बात है वहां पास से गुजरना भी मुश्किल होता है.
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