Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट में चारा घोटाले के देवघर कोषागार मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की आपराधिक अपील पर सुनवाई हुई. न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की अदालत में अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही रखी. उनका तर्क था कि ये गवाह लालू यादव को कथित अपराध से सीधे नहीं जोड़ते. मामले में सीबीआई (एएचडी) की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार भारती ने पक्ष रखा.
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अधिवक्ता ने बताया कि पहले गवाहों की सूची में अभियोजन गवाह (पीडब्ल्यू) 24, 37 और 52 के नाम अनजाने में छूट गए थे, जिनकी गवाही भी वे रखेंगे. उन्होंने अभियोजन गवाह 42 (शिव शंकर तिवारी) की गवाही रखी, जो 1994 में देवघर में कार्यपालक दंडाधिकारी थे. इस गवाह ने बताया कि जांच में 6,000 रुपये के आवंटन के मुकाबले देवघर कोषागार से करीब 98 लाख रुपये की निकासी सामने आई थी.
बचाव पक्ष के अनुसार इस गवाह के बयान से भी अपीलकर्ता का सीधा संबंध साबित नहीं होता. जिरह में लालू यादव की ओर से इन आंकड़ों पर कोई विशेष सवाल नहीं पूछा गया था.
पीडब्ल्यू 37 (प्रेम चंद ठाकुर) गोड्डा के जिला पशुपालन कार्यालय में लिपिक थे. उन्होंने कहा कि तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक शेषमुनि राम की राजनेताओं से जान-पहचान थी. जिरह में उन्होंने माना कि वे लालू यादव से कभी नहीं मिले और यह बात लोगों से सुनी थी. बचाव पक्ष ने इसे सुनी-सुनाई बात (हियरसे) बताया. गवाह ने यह भी स्वीकार किया कि सीबीआई को दिए धारा 161 के बयान में उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही थी.
इसी बीच, एक अन्य अपील के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने बताया कि उनके मुवक्किल लोक लेखा समिति के अध्यक्ष थे और उन पर मुख्य आरोप कथित अपराध पर पर्दा डालने का है. वे 26 नवंबर से, अवकाश के बाद, बहस शुरू करेंगे.
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