Ranchi: झारखंड सरकार द्वारा भैरव सिंह पर लगाए गए क्राइम कंट्रोल एक्ट को हाईकोर्ट के आदेश के बाद वापस ले लिया गया है. इस फैसले के बाद भैरव सिंह ने रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में इसे न्याय की जीत करार देते हुए कहा कि सत्य को दबाया नहीं जा सकता. उन्होंने इसे समाज के लिए आवाज उठाने वालों की नैतिक जीत बताया.
भैरव सिंह ने कहा कि सीसीए जैसे कड़े कानून संगठित अपराध, हत्या और लूट जैसे मामलों के लिए बनाए गए हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल जनहित के आंदोलनों से जुड़े व्यक्ति के खिलाफ किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने असहमति की आवाज को दबाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की थी, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ वर्षों में दर्ज 35 से 40 मामले अधिकांशतः सामाजिक और धार्मिक आंदोलनों से जुड़े रहे हैं. वर्ष 2015 में काली मंदिर प्रकरण और 2017 में महावीर जयंती के दौरान निकाली गई बाइक रैली का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन मामलों में या तो वे बरी हो चुके हैं या आरोप प्रमाणित नहीं हो सके. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि छह माह तक जेल में रहने के कारण हुए सामाजिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा.
प्रेस वार्ता में भैरव सिंह ने संथाल परगना और छोटानागपुर क्षेत्र में जनसांख्यिकीय बदलाव की बात करते हुए अवैध घुसपैठ का आरोप लगाया और कहा कि इससे स्थानीय युवाओं के रोजगार पर असर पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस कार्रवाई की मांग की.
सरना और सनातन पर चल रही बहस को लेकर उन्होंने एकता का संदेश देते हुए कहा कि प्रकृति की उपासना करने वाला हर व्यक्ति एक ही सांस्कृतिक धारा से जुड़ा है और समाज को बांटने की कोशिशों से बचना चाहिए.
अंत में भैरव सिंह ने कहा कि वे राष्ट्र, संस्कृति और झारखंड के हितों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि दबाव या दमन से वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाना उनका संकल्प बना रहेगा.
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