- प्रोजेक्ट भवन से हटाये गए फूड सेफ्टी ऑफिसर्स
- अब कुटे मैदान में देंगे धरना
Ranchi News : प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरने पर बैठे फूड सेफ्टी ऑफिसर्स को वहां से हटा दिया गया है. अब वे कुटे मैदान में धरने पर बैठेंगे. प्रशासन ने प्रोजेक्ट भवन के बाहर लगाए गए टेंट को हटा दिया है और प्रदर्शनकारियों को कुटे मैदान में धरना देने के लिए कहा गया है. प्रदर्शनकारी बिना किसी विवाद के वहां से हटने के लिए सहमत हो गए हैं.

छाता लगाकर धरने पर बैठे हैं अभ्यर्थी
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के पद पर कुल 56 रिक्तियां थीं, जिनमें 54 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था. नियुक्ति रद्द किए जाने से सभी की नौकरी चली है, जिसको लेकर सभी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वे अपनी नियुक्ति बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं.
प्रोजेक्ट भवन से हटने के बाद सभी चयनित अभ्यर्थी कुछ ही देर में कुटे मैदान पहुंचेंगे और वहां धरना-प्रदर्शन करेंगे. बता दें कि कुटे मैदान में JSSC-CGL अभ्यर्थी पहले से ही धरने पर बैठे हैं. ऐसे में अब खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के चयनित अभ्यर्थी भी वहीं अपना आंदोलन जारी रखेंगे.

भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

टेंट खोलते पुलिस जवान
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद उनका चयन हुआ था. इसके बाद सरकार ने नियुक्ति पत्र सौंपा और फिर उन्होंने अपने पद पर योगदान दिया. लेकिन नियुक्ति के करीब दो महीने बाद अचानक पूरी प्रक्रिया रद्द कर दी गई. इससे चयनित अभ्यर्थियों के सामने रोजगार और भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति मिलने के बाद कई लोगों ने दूसरी नौकरियां छोड़ दीं और झारखंड में नौकरी ज्वाइन की. अब नियुक्ति रद्द होने के बाद उनके सामने दोबारा रोजगार तलाशने की चुनौती है. उनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया में यदि किसी तरह की अनियमितता थी, तो इसकी जिम्मेदारी सफल अभ्यर्थियों पर नहीं डाली जानी चाहिए.
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए. यदि चयन प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो, लेकिन बिना किसी गलती के चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी नहीं छीनी जाए.
अभ्यर्थियों ने कहा कि नियुक्ति रद्द होने के फैसले से उनके परिवार भी प्रभावित हुए हैं. कई अभ्यर्थियों ने नौकरी की उम्मीद में आर्थिक और व्यक्तिगत स्तर पर बड़े फैसले लिए थे. ऐसे में अचानक नियुक्ति समाप्त होने से उनके सामने आर्थिक परेशानी भी उत्पन्न हो गई है.
अभ्यर्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर नियुक्ति बहाल करने या मामले का न्यायसंगत समाधान निकालने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उन्हें उचित न्याय नहीं मिलता, वे अपनी मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे.

