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हर घर तिरंगा अभियान के लिए सखी मंडल की महिलाएं बना रहीं 10 लाख तिरंगा

Pravin Kumar Ranchi :  आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर देश में अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया है. अमृत महोत्सव के तहत 13 से 15 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का आह्वान किया गया है. इस अभियान में सखी मंडल की महिलाएं एक बार फिर महत्वपूर्ण भूमिका में हैं. कोरोना महामारी के दौरान जिस तरह सखी मंडल की महिलाओं ने मास्क बनाकर अपने जज्बे और हुनर का परिचय दिया था, उसी तरह एक बार फिर राष्ट्र ध्वज की शान के लिए अलख जगाने का बीड़ा भी उन्होंने उठा लिया है. हर घर तिरंगा अभियान के लिए सखी मंडल की महिलाओं को 10 लाख तिरंगा निर्माण का लक्ष्य दिया गया है. जिसके लिए राज्य के विभिन्न जिलों में स्थापित टीपीसी सेंटर (परिधान उत्पादन ट्रेनिंग-सह-प्रोडक्शन सेंटर) में समूह की महिलाएं दिन- रात काम कर रही हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/23-1.jpg"

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राष्ट्र ध्वज निर्माण के लिए महिलाओं को दी गयी है खास ट्रेनिंग

तिरंगा निर्माण से जुड़ी लगभग 1,000 से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को ‘ध्वज कोड 2002’ के मानकों के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज निर्माण हेतु प्रशिक्षित किया गया है. रांची टीपीसी में तिरंगा निर्माण से जुड़ी सविता देवी ने बताया - झंडा बनाने के पहले हमें ट्रेनिंग देकर बताया गया कि तिरंगा का अनुपात 3:2 रखना है. सिलाई के समय ध्यान रखना है कि अलग रंग के धागे एक दूसरे में न जुड़े. हम सभी माहिलाएं इस कार्य से जुड़कर बहुत खुश और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. साथ ही हमें इससे अच्छी आमदनी भी हो रही है. इसे भी पढ़ें- कांग्रेस">https://lagatar.in/congress-in-charge-avinash-pandey-asked-the-mlas-why-cross-voting-in-the-presidential-election/">कांग्रेस

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हमें गर्व है कि हम इस काम आए- किरण देवी 

किरण देवी कहती हैं- देश का सम्मान बढ़ाने के लिए हर घर तिरंगा फहराया जाएगा. यह तिरंगा हमारे हाथों से तैयार होकर जाएगा, इससे बड़ी बात और क्या होगी. कोरोना के समय भी हमने मास्क बनाकर देश की सेवा में अपना योगदान दिया था. लेकिन राष्ट्र ध्वज को तैयार करने के इस कार्य में एक अलग ही खुशी महसूस हो रही है.

किन बातों का रखा गया है ध्यान 

तिरंगा को अंतिम रूप देने से पहले कई स्टेज पर काम होता है. जैसे - सिलाई के लिए गाइडलाइन का पालन करते हुए मशीन से सही आकार में काटा जाता है. इसके बाद महिलाओं द्वारा सिलाई की जाती है. सिलाई के उपरांत इसकी जांच की जाती है कि कहीं कोई त्रुटि ना हो. इसके बाद आखिरी स्टेज में स्क्रीन प्रिंटिंग के जरिये आशोक चक्र बनाकर इसकी पैकेजिंग की जाती है. यह सारा काम महिलाओं द्वारा ही किया जा रहा है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/22-10.jpg"

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घर-घर लोगों को जागरूक भी करेंगी समूह की महिलाएं 

हर घर तिरंगा अभियान के तहत सभी टीपीसी में निर्मित ये झंडे संकूल स्तरीय संगठन के जरिये सभी सखी मंडल सहित सभी घरों तक पहुचाएं जायेंगे. सखी मंडल की महिलाएं सिर्फ राष्ट्र ध्वज निर्माण ही नहीं, बल्कि आजादी के 75वें वर्षगांठ पर लोगों के घरों में जाकर उन्हें पोस्टर, बैनर, विडियो आदि के माध्यम से राष्ट्रध्वज के महत्व और उसकी गरिमा के विषय में जानकारी भी देंगी. इन महिलाओं को प्रशिक्षण देकर ध्वज संहिता के बारे में बारीकी से बताया गया है. इसे भी पढ़ें- सरकार">https://lagatar.in/government-will-provide-all-possible-help-to-the-people-of-the-state-hemant-soren/">सरकार

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