London : पश्चिम एशिया संकट को लेकर गुरुवार को ब्रिटेन में हुई बैठक (होर्मुज समिट) में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री वर्चुअली शामिल हुए. बैठक ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई. बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर मंथन किया गया.
खबर है कि बैठक में 60 से अधिक देशों ने शिरकत की. बैठक में इस महत्वपूर्ण(स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) तेल मार्ग से आवागमन की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए सैन्य उपायों के बजाय राजनयिक और राजनीतिक उपायों पर चर्चा की गयी.
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बैठक में विचार व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से निर्बाध आवागमन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के महत्व पर बल दिया. उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव की चर्चा की.
बताया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों में नाविकों को खोने वाला एकमात्र देश भारत है. विक्रम मिस्री ने कहा कि संबंधित पक्षों के कूटनीति और संवाद के मार्ग पर लौटने से ही इस संकट से निजात पाया जा सकता है.
जान लें कि ब्रिटेन में हुई यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान को ध्यान में रखते हुए की गयी हैय ट्रंप ने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने की जिम्मेदारी उन एशियाई और यूरोपीय देशों को उठानी चाहिए, जिसका तेल इस मार्ग से आता है.
बताया गया कि वाशिंगटन ने बैठक में भाग नहीं लिया. हालांकि भारत ने अभी तक ब्रिटेन और 35 अन्य देशों द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त बयान का समर्थन नहीं किया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों में योगदान देने की तत्परता दिखाई गयी है.
दरअसल भारत इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तेहरान के साथ सीधी बातचीत के समर्थन में है.जैसा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले कहा था. इस बातचीत के अच्छे परिणाम निकले हैं. बता दें कि ईरान ने अब तक भारतीय ध्वज वाले 6 जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति प्रदान की है.
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