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बड़े पैमाने पर वन भूमि पर हो रहा कब्जा, वन विभाग व प्रशासन ने भू-माफिया नेटवर्क पर कसा शिकंजा

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Ranchi : रांची जिले में वन भूमि पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है. जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से भू-माफिया का एक बड़ा नेटवर्क समाने आया है. कांके क्षेत्र के मौजा रुदिया स्थित प्लॉट संख्या 441 को लेकर दायर वन भूमि अतिक्रमण वाद में अदालत ने सख्त आदेश जारी किया है.

 

यह पूरा मामला जनता दरबार से शुरू हुआ, जहां ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गैर मजरूआ और वन भूमि पर अवैध निर्माण कर कब्जा किया जा रहा है. इसके बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए और वन प्रमंडल से रिपोर्ट मंगाई गई. रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि संबंधित भूमि 1956 से अधिसूचित सुरक्षित वन है. इस बारे में आजसू के केंद्रीय कार्यालय सचिव बनमाली मंडल ने भी जिला प्रशासन को शिकायत की थी.

 

अब तक आपने पढ़ा....

 

प्रशासन व वन विभाग द्वारा की गयी संयुक्त सीमांकन के दौरान पाया गया कि भूमि के भीतर शेड का निर्माण किया गया है और पक्के कॉलम खड़े किए गए हैं. बुधिया परिवार के द्वारा यह निर्माण न केवल अवैध पाया गया, बल्कि वन अधिनियमों का सीधा उल्लंघन भी माना गया है. न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में कहा कि प्रतिवादी पक्ष द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण की बात अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार की गई है और सीमांकन के बाद निर्माण हटाने का आश्वासन भी दिया गया था. बावजूद इसके अतिक्रमण बना हुआ है.

 

अदालत ने स्पष्ट किया कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का निजी स्वामित्व स्वीकार्य नहीं किया जा सकता. 21 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने का आदेश देते हुए यह भी कहा गया है कि अनुपालन नहीं होने पर बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी.

 

इस बीच सूत्रों ने बताया है कि रांची शहर के चारों तरफ वन विभाग और गैर मजरूआ जमीन को कब्जा कर अवैध तरीके से बेचा गया है. अगर जिला प्रशासन व वन विभाग जांच करे तो हजारों एकड़ जमीन की अवैध खरीद-बिक्री का खुलासा हो सकता है. साथ ही वह नेटवर्क भी सामने आ सकता है, जो कांके, तुपुदाना, ओरमांझी, टाटीसिल्वे, नामकुम आदि क्षेत्र में फॉरेस्ट लैंड व गैर मजरूआ जमीन की खरीद बिक्री का काम करता है.

 

उल्लेखनीय है कि अवैध जमीन कारोबार को लेकर थानों में कई प्राथमिकियां दर्ज है. साथ ही कुछ मामलों की जांच ईडी भी कर रही है. लेकिन लोगों को कार्रवाई का इंतजार है. 

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