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बड़े कारोबारी की नजर वन भूमि पर, न्यायालय ने माना अतिक्रमण

Ranchi: राजधानी रांची के आसपास के इलाकों में जमीन की कीमत बढ़ने के साथ ही अब भू-माफियाओं और बड़े कारोबारियों की नजर वन भूमि पर टिक गई है. वन भूमि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने और अवैध निर्माण करने से भी ये लोग पीछे नहीं हट रहे हैं. ऐसा ही एक गंभीर मामला कांके अंचल के मौजा रुदिया से सामने आया है.
 
सिंबोलिक फोटो

Ranchi: राजधानी रांची के आसपास के इलाकों में जमीन की कीमत बढ़ने के साथ ही अब भू-माफियाओं और बड़े कारोबारियों की नजर वन भूमि पर टिक गई है. वन भूमि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने और अवैध निर्माण करने से भी ये लोग पीछे नहीं हट रहे हैं. ऐसा ही एक गंभीर मामला कांके अंचल के मौजा रुदिया से सामने आया है. जहां 17 एकड़ गैरमजरूआ एवं अधिसूचित वन भूमि पर अवैध कब्जे का प्रयास किया गया.


यह मामला 13 मई 2025 को आयोजित जनता दरबार में ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत के बाद उजागर हुआ. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भू-माफियाओं द्वारा 17 एकड़ गैरमजरूआ भूमि पर चहारदीवारी कर अवैध कब्जा किया जा रहा है. 


शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अनुमण्डल पदाधिकारी, सदर ने वन प्रमंडल कार्यालय से जांच रिपोर्ट मांगी. जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित भूमि 14 सितंबर 1956 की अधिसूचना के तहत अधिसूचित सुरक्षित वन भूमि है.


इसके बाद रांची जिले के कांके क्षेत्र अंतर्गत मौजा रुदिया स्थित इस भूमि को लेकर वन भूमि अतिक्रमण वाद संख्या 03/25 दर्ज किया गया. मामले की सुनवाई के दौरान समाहर्ता-सह-वन प्रमंडल पदाधिकारी, रांची ने स्पष्ट रूप से माना कि खाता संख्या 32, प्लॉट संख्या 441 अधिसूचित एवं सीमांकित वन भूमि है, जिस पर अवैध निर्माण किया गया है.


जांच और संयुक्त सीमांकन के दौरान यह भी पाया गया कि प्लॉट संख्या 441 के भीतर लगभग 0.36 एकड़ वन भूमि पर शेड का निर्माण किया गया है तथा निर्माण विस्तार के उद्देश्य से 18 पक्के कॉलम भी खड़े किए गए हैं. प्रमण्डलीय अमीन एवं अंचलीय अमीन द्वारा संयुक्त रूप से की गई मापी में इन तथ्यों की पुष्टि हुई है.


न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि प्रतिवादी का वन भूमि पर कोई वैधानिक अधिकार नहीं है और यह भूमि झारखंड सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के अंतर्गत सार्वजनिक भूमि है. न्यायालय ने 21 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है, अन्यथा प्रशासन एवं वन विभाग द्वारा बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी.


यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि किस तरह प्रभावशाली कारोबारी और भू-माफिया वन भूमि पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि इस बार न्यायालय और प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है.


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