Ranchi: असम सरकार ने सरकार ने चाय बागान मजदूरों को जमीन का मालिकाना हक देने के लिए एक विधेयक पारित किया है, जिससे लाखों आदिवासियों और अन्य मजदूरों को लाभ मिलेगा. इसपर पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने असम सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला आदिवासी समाज के अधिकारों को मजबूत करने वाला है और असम के मुख्यमंत्री डॉ हिमंता बिस्वा सरमा को इसके लिए धन्यवाद दिया है.
असम कैबिनेट का बड़ा फैसला
असम कैबिनेट ने झारखंड की माटी से जुड़े आदिवासियों (चाय बागान श्रमिकों) को वहां अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है. यह फैसला चाय बागान मजदूरों के दशकों पुराने संघर्ष को सम्मान देने वाला है.
चाय बागान मजदूरों को क्या मिलेगा
• जमीन का मालिकाना हक
• अनुसूचित जनजाति में शामिल होने का अधिकार
• सरकारी नौकरियों में आरक्षण
• शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में आरक्षण
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