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धाराओं की सामग्री याचिकाकर्ता के खिलाफ नहीं बनायी गयी
न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने 22 जुलाई को दिए एक फैसले में कहा कि उक्त वीडियो में प्रसिद्ध हिंदी फिल्म गीत के साथ मेंटोस विज्ञापन का मिश्रण था. अदालत ने कहा, "शिकायत में किये गये अनुमान को देखते हुए, जहां तक भारतीय दंड संहिता की दंडात्मक धारा 419, 420, 468, 500, 505 का संबंध है, इन धाराओं की सामग्री याचिकाकर्ता के खिलाफ नहीं बनायी गयी है. इसे भी पढ़ें - हाईकोर्ट">https://lagatar.in/high-court-order-ved-prakash-should-be-reinstated-councilor-of-ward-39-city-development-department-does-not-have-the-right-to-suspend/">हाईकोर्टका आदेश : वेद प्रकाश को पुनः वार्ड 39 का पार्षद बहाल किया जाये, नगर विकास विभाग के पास निलंबन का अधिकार नहीं
निचली अदालत द्वारा संज्ञान भी कानून के अनुरूप नहीं
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि निचली अदालत द्वारा संज्ञान भी कानून के अनुरूप नहीं है."याचिकाकर्ता के खिलाफ क्या सामग्री है. इसका खुलासा आदेश में नहीं किया गया है. संज्ञान लेने के लिए, एक विस्तृत आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि अभियुक्त के खिलाफ प्रथम दृष्टया सामग्री क्या है. जिसे संज्ञान आदेश में प्रकट करने की आवश्यकता है, जो कि मामले में कमी है. अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 419 व्यक्ति द्वारा धोखाधड़ी के लिए सजा की बात करती है. जिसके घटक पूरी शिकायत को पढ़कर याचिकाकर्ता के खिलाफ नहीं बनते हैं. इसे भी पढ़ें - बोकारो">https://lagatar.in/bokaro-congress-started-satyagraha-said-central-government-is-working-to-harass-sonia-gandhi/">बोकारो: कांग्रेस ने शुरू किया सत्याग्रह, कहा- केंद्र सरकार सोनिया गांधी को परेशान करने का काम कर रही [wpse_comments_template]

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