Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

पूर्व CM रघुवर दास की 'मिर्ची लगी' पैरोडी वीडियो पोस्ट मामला : हाईकोर्ट ने खारिज की गिरफ्तार व्यक्ति के खिलाफ FIR

Advertisement
Advertisement
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने सर्वप्रीत सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है. जिन्हें 2018 में 32 सेकेंड का वीडियो क्लिप पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. जिसमें लोकप्रिय हिंदी फिल्म गीत `तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं`, मेंटोस की एक तस्वीर, माउथ फ्रेशनर की एक तस्वीर थी. सर्वप्रित सिंह पर विज्ञापन और तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास का झारखंड विधानसभा में एक बयान देने का एक छोटा वीडियो पोस्ट करने के बाद आपराधिक कार्रवाई चल रही थी. पढ़ें - रामगढ़">https://lagatar.in/ramgarh-manas-singh-of-dav-barkakana-got-third-place-in-national-kickboxing-1500-players-from-across-the-country-took-part/">रामगढ़

: DAV बरकाकाना के मानस सिंह को राष्ट्रीय कीक बॉक्सिंग में मिला तीसरा स्थान, देशभर के 1500 खिलाड़ियों ने लिया था हिस्सा
इसे भी पढ़ें - महंगाई,">https://lagatar.in/opposition-uproar-continues-in-lok-sabha-rajya-sabha-over-inflation-gst-suspension-slogans-will-not-work-dictatorship/">महंगाई,

जीएसटी, निलंबन पर लोकसभा-राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा जारी, तानाशाही नहीं चलेगी के नारे लगे

धाराओं की सामग्री याचिकाकर्ता के खिलाफ नहीं बनायी गयी

न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने 22 जुलाई को दिए एक फैसले में कहा कि उक्त वीडियो में प्रसिद्ध हिंदी फिल्म गीत के साथ मेंटोस विज्ञापन का मिश्रण था. अदालत ने कहा, "शिकायत में किये गये अनुमान को देखते हुए, जहां तक ​​भारतीय दंड संहिता की दंडात्मक धारा 419, 420, 468, 500, 505 का संबंध है, इन धाराओं की सामग्री याचिकाकर्ता के खिलाफ नहीं बनायी गयी है. इसे भी पढ़ें - हाईकोर्ट">https://lagatar.in/high-court-order-ved-prakash-should-be-reinstated-councilor-of-ward-39-city-development-department-does-not-have-the-right-to-suspend/">हाईकोर्ट

का आदेश : वेद प्रकाश को पुनः वार्ड 39 का पार्षद बहाल किया जाये, नगर विकास विभाग के पास निलंबन का अधिकार नहीं

निचली अदालत द्वारा संज्ञान भी कानून के अनुरूप नहीं

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि निचली अदालत द्वारा संज्ञान भी कानून के अनुरूप नहीं है."याचिकाकर्ता के खिलाफ क्या सामग्री है. इसका खुलासा आदेश में नहीं किया गया है. संज्ञान लेने के लिए, एक विस्तृत आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि अभियुक्त के खिलाफ प्रथम दृष्टया सामग्री क्या है. जिसे संज्ञान आदेश में प्रकट करने की आवश्यकता है, जो कि मामले में कमी है. अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 419 व्यक्ति द्वारा धोखाधड़ी के लिए सजा की बात करती है. जिसके घटक पूरी शिकायत को पढ़कर याचिकाकर्ता के खिलाफ नहीं बनते हैं. इसे भी पढ़ें - बोकारो">https://lagatar.in/bokaro-congress-started-satyagraha-said-central-government-is-working-to-harass-sonia-gandhi/">बोकारो

: कांग्रेस ने शुरू किया सत्याग्रह, कहा- केंद्र सरकार सोनिया गांधी को परेशान करने का काम कर रही [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही