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CUJ के राष्ट्रीय सम्मेलन में इसरो के पूर्व अध्यक्ष ने रिमोट सेंसिंग पर छात्रों को दी जानकारी

झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUJ) में सतत संसाधन प्रबंधन और समाज कल्याण के लिए भू-स्थानिक नवाचार (GISRS-2026) विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया.
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Ranchi : झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUJ) में सतत संसाधन प्रबंधन और समाज कल्याण के लिए भू-स्थानिक नवाचार (GISRS-2026) विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग द्वारा इंडियन सोसाइटी ऑफ जियोमैटिक्स (ISG) रांची चैप्टर के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया.

 

सम्मेलन का उद्घाटन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष और पद्मश्री से सम्मानित वैज्ञानिक ए. एस. किरण कुमार ने किया. अपने उद्घाटन व्याख्यान में उन्होंने प्रकृति, मानवीय इंद्रियों और आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीक के बीच संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि मानव शरीर स्वयं एक प्राकृतिक रिमोट सेंसिंग सिस्टम की तरह कार्य करता है. उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक उपग्रहों और इंटेलिजेंट रोबोटिक सिस्टम के लिए सेंसर विकसित करने में प्रकृति और मानवीय संवेदन तंत्र से प्रेरणा लेते हैं.

 

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मानव शरीर में आंख, कान, नाक, त्वचा और जीभ सेंसर की तरह कार्य करते हैं, उसी प्रकार उपग्रहों में विभिन्न प्रकार के सेंसर पृथ्वी से जानकारी एकत्र करते हैं. मस्तिष्क को उन्होंने प्रोसेसर और स्मृति को डेटा स्टोरेज के रूप में उदाहरण देते हुए बताया कि आधुनिक अंतरिक्ष तकनीक काफी हद तक प्रकृति से प्रेरित है.

 

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति (प्रभारी) प्रो. आर. के. डे ने की. उन्होंने कहा कि रिमोट सेंसिंग और जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) जैसी भू-स्थानिक तकनीकें आज साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की महत्वपूर्ण आधारशिला बन चुकी हैं. इन तकनीकों की मदद से आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में अधिक सटीक निर्णय संभव हो पाए हैं.

 

कार्यक्रम की शुरुआत जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभागाध्यक्ष और सम्मेलन संयोजक डॉ. विकास रंजन परिदा के स्वागत भाषण से हुई. सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में आईआईटी खड़गपुर के प्रो. एम. डी. बेहरा उपस्थित थे. इस अवसर पर कुलसचिव के. के. राव, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन स्कूल के डीन प्रो. मनोज कुमार, ISG रांची चैप्टर के अध्यक्ष प्रो. ए. सी. पांडेय और सम्मेलन के मुख्य समन्वयक डॉ. किरण जालम सहित कई शिक्षाविद व वैज्ञानिक मौजूद रहे.

 

दो दिनों तक चले सम्मेलन में प्लेनरी व्याख्यान, आमंत्रित व्याख्यान और लगभग 50 तकनीकी शोध प्रस्तुतियां दी गईं. सत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का मानचित्रण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण जैसे विषयों पर चर्चा हुई.

 

सम्मेलन के दौरान SPIC MACAY के सहयोग से शास्त्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया. समापन सत्र में उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए प्रतिभागियों को बेस्ट पेपर और बेस्ट पोस्टर पुरस्कार प्रदान किए गए.

 

सम्मेलन के अंत में प्रतिभागियों को पतरातू घाटी और पतरातू डैम का शैक्षिक भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन की चुनौतियों को प्रत्यक्ष रूप से समझा.

 

 

 

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