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मुआवजा घोटाला : ACB जांच में खुलासा, कोडरमा के पूर्व भू-अर्जन पदाधिकारी के पास आय से पांच गुना अधिक संपत्ति

कोडरमा-रांची रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा वितरण में कथित अनियमितता और कमीशनखोरी मामले में कोडरमा के तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी शारदानंद देव के खिलाफ एसीबी की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. जांच में आरोप है कि शारदानंद देव ने पद का दुरुपयोग करते हुए मुआवजा राशि के भुगतान में गड़बड़ी की और लाभुकों से 10 से 25 प्रतिशत तक कमीशन की वसूली कर अवैध संपत्ति अर्जित की.
 

Ranchi :  कोडरमा-रांची रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा वितरण में कथित अनियमितता और कमीशनखोरी मामले में कोडरमा के तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी शारदानंद देव के खिलाफ एसीबी की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.

 

जांच में आरोप है कि शारदानंद देव ने पद का दुरुपयोग करते हुए मुआवजा राशि के भुगतान में गड़बड़ी की और लाभुकों से 10 से 25 प्रतिशत तक कमीशन की वसूली कर अवैध संपत्ति अर्जित की. 

 

एसीबी जांच के अनुसार, 1 मार्च 2014 से 31 जनवरी 2016 तक के जांच अवधि (चेक पीरियड) में शारदानंद देव की वैध आय महज 16 लाख 47 हजार 166 रुपये थी, जबकि इसी अवधि में उनका कुल खर्च और निवेश 90 लाख 27 हजार 290 रुपये पाया गया.   जांच एजेंसी के मुताबिक, यह राशि उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से करीब पांच गुना अधिक है और आय के अनुरूप नहीं है.

 

शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच

मामले की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी, जब कोडरमा-रांची रेल ट्रैक निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में गड़बड़ी की शिकायत एसीबी को मिली थी. हजारीबाग एसीबी थाना में पदस्थापित तत्कालीन इंस्पेक्टर इंदुभूषण ओझा के लिखित प्रतिवेदन पर मामला दर्ज किया गया था.

 

जांच के दौरान कुश्मा देवी नामक एक महिला ने आरोप लगाया था कि रेलवे परियोजना के लिए उसकी जमीन अधिग्रहित की गई थी. मुआवजे का चेक जारी होने के बाद तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी ने उसे कार्यालय के नाजिर नवलेश कुमार से संपर्क करने को कहा.

 

आरोप है कि बैंक खाता खुलवाने के नाम पर महिला से कई सादे कागजों और निकासी प्रपत्रों पर हस्ताक्षर करा लिए गए. बाद में बैंक कर्मियों की कथित मिलीभगत से उसके खाते से मुआवजे की राशि का एक हिस्सा निकाल लिया गया.

 

बैंक खातों में लाखों रुपये जमा होने का मिला ब्योरा

एसीबी की जांच में यह भी सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान शारदानंद देव ने अपनी पत्नी सुधा देव, कथित पत्नी सुमित्रा देवी, एलआईसी एजेंट महेंद्र कुमार और स्वयं के नाम से संचालित खातों में 54 लाख 2 हजार 287 रुपये जमा कराए थे. यह राशि जांच एजेंसी के संदेह के घेरे में है.

परिजनों के नाम खरीदी गई जमीन

जांच में पता चला कि इसी अवधि में शारदानंद देव ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर 20 लाख 76 हजार 600 रुपये मूल्य की लगभग 15 डिसमिल जमीन खरीदी थी. इसके अलावा उनकी बेटी स्मिता देव के नाम पर भी 1 लाख 30 हजार रुपये की जमीन खरीदे जाने की जानकारी मिली है.

 

चास में मिला तीन मंजिला आलीशान मकान

एसीबी की जांच के दौरान बोकारो के चास क्षेत्र में शारदानंद देव से जुड़ा एक तीन मंजिला आलीशान मकान होने की भी जानकारी सामने आई. जांच रिपोर्ट के अनुसार, मकान के निर्माण पर करीब 75 लाख रुपये खर्च किए गए थे. इसमें जमीन की कीमत शामिल नहीं है.

आगे बढ़ सकती है कानूनी कार्रवाई

प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने आय से अधिक संपत्ति और मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की थी. जांच एजेंसी अब अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों, बैंक लेन-देन और कथित कमीशनखोरी के पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है.  आने वाले दिनों में इस मामले में और कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है.

 

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