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वेजफेड के पूर्व MD जयदेव प्रसाद सिंह पर करोड़ों के गबन का आरोप, FIR की तैयारी में ACB

Ranchi: एसीबी ने झारखंड स्टेट आदिवासी को-ऑपरेटिव वेजिटेबल मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (वेजफेड) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक जयदेव प्रसाद सिंह के विरुद्ध पद के दुरुपयोग और करोड़ों रुपये के सरकारी धन के गबन की पुष्टि कर दी है.
 

Ranchi: एसीबी ने झारखंड स्टेट आदिवासी को-ऑपरेटिव वेजिटेबल मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (वेजफेड) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक जयदेव प्रसाद सिंह के विरुद्ध पद के दुरुपयोग और करोड़ों रुपये के सरकारी धन के गबन की पुष्टि कर दी है.


पीई में पुख्ता सबूत मिलने के बाद, एसीबी ने 29 जनवरी 2026 को लोकायुक्त को पत्र लिखकर जयदेव प्रसाद सिंह के खिलाफ नियमित प्राथमिकी दर्ज करने की आधिकारिक अनुमति मांगी है. इसके साथ ही जांच रिपोर्ट की एक प्रति मंत्रिमंडल निगरानी एवं सचिवालय विभाग को भी भेज दी गई है ताकि विभाग को पूरे मामले की वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सके.

 

क्या है मामला 


यह मामला 2021 से चल रहा है. लोकायुक्त की अनुशंसा पर तत्कालीन डीजी एसीबी के आदेशानुसार 19 फरवरी 2021 को प्रारंभिक जांच दर्ज की गई थी. जांच के दौरान वेजफेड में हुई वित्तीय अनियमितताओं की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय दल का गठन किया गया था.
गबन की यह घटना 1 अप्रैल 2017 से 5 जुलाई 2018 के बीच की है. तत्कालीन एमडी जयदेव प्रसाद सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर सरकारी राशि का बंदरबांट किया. 


रांची के नगड़ी में 'नेचुरली वेंटिलेटेड पॉली हाउस योजना' (2013) में धांधली को लेकर जिस ठेकेदार (ग्रीनटेक इंडिया) पर पहले से प्राथमिकी दर्ज थी, जयदेव प्रसाद सिंह ने उसी ठेकेदार को दोबारा कार्य आवंटित कर दिया.


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