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चैंबर भवन में निशुल्क एक्युप्रेशर स्वास्थ्य शिविर, 30 लोगों को मिला उपचार व परामर्श

एफजेसीसीआई (FJCCI) और  डॉ. लालचंद बगड़िया एक्युप्रेशर संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में रांची के चैंबर भवन में नि:शुल्क स्वास्थ्य जागरूकता एवं एक दिवसीय एक्युप्रेशर चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया.
 

Ranchi :  एफजेसीसीआई (FJCCI) और  डॉ. लालचंद बगड़िया एक्युप्रेशर संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में रांची के चैंबर भवन में नि:शुल्क स्वास्थ्य जागरूकता एवं एक दिवसीय एक्युप्रेशर चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया.

 

शिविर में विभिन्न रोगों से पीड़ित 30 लोगों को उपचार एवं स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया गया. शिविर का शुभारंभ चैंबर के उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया, महासचिव रोहित अग्रवाल और संस्थान के अध्यक्ष रमा शंकर बगड़िया ने गुरुजी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया. 

 

इस अवसर पर महासचिव रोहित अग्रवाल ने थैरेपिस्टों एवं उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि चैंबर व्यवसायियों और उद्यमियों के व्यवसायिक विकास के साथ-साथ उनके स्वस्थ जीवन को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानता है. इसी उद्देश्य से समय-समय पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाता है. 

 

उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने बताया कि ब्रह्मलीन गुरुदेव स्व. लालचंद बगड़िया ने वर्ष 1989 में रांची के बड़ा तालाब के पास लक्ष्मीनारायण मंदिर के ऊपर एक्युप्रेशर चिकित्सा केंद्र की शुरुआत की थी. कहा कि एक्युप्रेशर के माध्यम से हाथ और पैरों के विभिन्न बिंदुओं पर दबाव देकर शरीर में रक्त संचार को संतुलित किया जाता है, जिससे कई प्रकार के रोगों में लाभ मिलता है.

 

 

लोहिया ने कहा कि आज के व्यवसायिक तनावपूर्ण जीवन में लोग अपने स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते, ऐसे में एक्युप्रेशर जैसी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति काफी लाभकारी साबित हो रही है. वहीं संस्थान के अध्यक्ष रमा शंकर बगड़िया ने कहा कि चैंबर के सहयोग से एक्युप्रेशर चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार को और अधिक बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा.

 

वहीं खुशी गुप्ता ने स्वास्थ्य जागरूकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली, फास्ट फूड और शारीरिक श्रम की कमी के कारण लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं. इसलिए हमें अपनी जीवनशैली में सुधार करते हुए योग, ध्यान, व्यायाम और संतुलित आहार को अपनाना चाहिए.

 

डॉ. संतोष झा ने एक्युप्रेशर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पूर्णतः भारतीय चिकित्सा पद्धति है, जिसका उल्लेख अथर्ववेद में मर्म चिकित्सा के रूप में मिलता है. इसमें शरीर के विभिन्न बिंदुओं पर दबाव देकर रोगों से राहत दिलाई जाती है और आज यह पद्धति काफी लोकप्रिय हो चुकी है.

 

शिविर में मुख्य रूप से शुगर, बीपी, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, घुटने का दर्द तथा माइग्रेन से ग्रसित मरीजों का उपचार किया गया. शिविर को सफल बनाने में संस्थान के लगभग 30 थैरेपिस्टों ने सक्रिय सहयोग दिया. कार्यक्रम का संचालन प्रदीप चौधरी ने किया तथा अंत में राष्ट्रगान के साथ शिविर का समापन हुआ.

 

 

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