- झारखंड में नए आपराधिक कानूनों को लागू करने की तैयारी तेज
Ranchi News : झारखंड में नए आपराधिक कानूनों को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए तकनीकी और न्यायिक व्यवस्था मजबूत की जा रही है. ई-साक्ष्य, ई-समन, ई-एफआईआर और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई जैसी सुविधाओं का दायरा बढ़ाने की तैयारी है.
नए आपराधिक कानूनों से जुड़ी कुल 65 जरूरी अधिसूचनाओं में से अब तक 34 जारी हो चुकी हैं, बाकी अधिसूचनाएं भी जल्द जारी करने पर जोर दिया गया है. इसके साथ ही नए कानूनों से जुड़ी जानकारी को एक डैशबोर्ड पर अपडेट करने की तैयारी है.
अदालत और जेलों में वीडियो सुविधा बढ़ेगी
झारखंड में फिलहाल 400 अदालत कक्ष और 31 जेल हैं. जेलों में 163 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग क्यूबिकल काम कर रहे हैं. अब अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा को 60 से 70 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. रांची, हजारीबाग और धनबाद में अतिरिक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा लगाने की तैयारी है.
इसके अलावा फोरेंसिक लैब, अस्पताल और पुलिस थानों को भी इस सुविधा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. इससे जरूरत पड़ने पर गवाह, आरोपी या विशेषज्ञ वीडियो के जरिए अदालत की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे.
समन पहुंचाने में अदालत की भूमिका बढ़ेगी
नए सिस्टम में अदालत से जारी होने वाले समन को संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाने में पुलिस की भूमिका कम करने की योजना है. कोशिश है कि अदालत के स्तर से ही समन की तामील कराई जाए, ताकि प्रक्रिया तेज और आसान हो सके. राज्य सरकार ई-साक्ष्य, ई-समन, सामुदायिक सेवा और न्याय श्रुति से जुड़े चारों मॉडल नियमों को पहले ही लागू कर चुकी है. अब इनका सही और ज्यादा इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है.
ई-एफआईआर को नियमित केस में बदलने की प्रक्रिया तेज
झारखंड में ऑनलाइन दर्ज होने वाली ई-एफआईआर को सामान्य एफआईआर में बदलने की प्रक्रिया 93.96 प्रतिशत तक पहुंच गई है. अब इसे 100 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं जीरो एफआईआर दूसरे राज्य में कागज या दूसरे भौतिक माध्यम से भेजने के बजाय CriMAC के जरिए ऑनलाइन भेजने पर जोर दिया जा रहा है. इससे मामलों को दूसरे राज्य की पुलिस तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा.
पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण पूरा
नए आपराधिक कानूनों को समझने और लागू करने के लिए झारखंड में पुलिस और संबंधित अधिकारियों के प्रशिक्षण का काम सभी प्रमुख क्षेत्रों में 100 प्रतिशत पूरा होने की जानकारी दी गई है. अब रिफ्रेशर ट्रेनिंग पर भी काम किया जा रहा है, ताकि पुलिसकर्मी नए नियमों को सही तरीके से लागू कर सकें.
गंभीर अपराधों के लिए बनेगी स्पष्ट प्रक्रिया
संगठित अपराध, मॉब लिंचिंग और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में कानून की धाराओं के इस्तेमाल को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश यानी एसओपी तैयार करने पर जोर दिया गया है. इन गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने से पहले जिले के एसपी या अपर एसपी से मंजूरी लेने की व्यवस्था बनाने की बात कही गई है. इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि गंभीर धाराओं का इस्तेमाल जांच और तथ्यों के आधार पर ही किया जाए.
कुल मिलाकर झारखंड में नए आपराधिक कानूनों को लागू करने के लिए तकनीक के इस्तेमाल, ऑनलाइन प्रक्रिया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ाने पर खास जोर दिया जा रहा है. इससे पुलिस जांच और अदालत की कार्यवाही को ज्यादा तेज और पारदर्शी बनाने की कोशिश है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


