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प्रकृति की मनोरम वादियों का लुत्फ उठाने के लिए भी बंगाल व ओडिशा से आते हैं भक्त
इस बार भी काफी श्रद्धालु भोलेबाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं. विदित हो कि यहां पहुंचना इतना आसान भी नहीं है. पहाड़ों के बीच से होते हुए यहां तक भक्त पहुंचते हैं. यहां तक की प्रकृति की मनोरम वादियों का लुत्फ उठाने के लिए भी बंगाल व ओडिशा से भक्त पहुंचते हैं. इस मंदिर की खास बात यह है कि भगवान भोले शंकर की पूजा-अर्चना ब्राह्मण के हाथों नहीं होती है, बल्कि वहीं के संथाल परिवार के सदस्य बाबा भोले की पूजा अर्चना करते हैं. सावन में राज्य के ही नहीं बल्कि बंगाल व ओडिशा से काफी संख्या में शिव भक्त काशीडांगा मंदिर पहुंचते हैं. इसे भी पढ़े : चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-16-couples-performed-collective-rudrabhishek-of-jyotirlinga-in-thakurbari-temple/">चाकुलिया: ठाकुरबाड़ी मंदिर में 16 जोड़ों ने किया ज्योतिर्लिंग का सामूहिक रुद्राभिषेक [wpse_comments_template]

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