: विधायक ने पीसीसी पथ निर्माण कार्य का किया शिलान्यास
बुधवार को किया जाएगा विसर्जन
उनकी पत्नी सबिता गोप ने बताया कि ग्रामीण जंगल से करमा पेड़ की तीन डालियों को काटकर अखाड़े के बीचो-बीच गाड़ते हैं. महिलाएं करम डाली की पूजा अर्चना के लिए ढोल एवं मांदर की थाप पर करमा गीत गाती हुई पूजा स्थल पर पहुंचेंगी. रातभर जागरण होगा साथ ही पारंपरिक वेशभूषा में गीत गाकर समूह नृत्य प्रस्तुत की जाएंगी. वहीं करम डाली लाने के दौरान युवक-युवतियां मांदर की थाप पर थिरकती नजर आईं. इसके साथ ही आज तोरे करम राजा घरे-दुवारे कल तोरे करम राजा शंख लदीर पारे तथा इति इति जावा किया किया जावा जैसे गानों से गांव-गांव गूंजता रहा. बता दें कि बुधवार को करमा डाली की पूजा कर विसर्जित किया जाएगा. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-missing-rythus-body-recovered-from-the-pit-of-the-house/">जमशेदपुर: घर के गड्ढ़े से बरामद हुआ लापता रथु का शव
ऐसे मनाया जाता है करमा पर्व
करमा पर्व के दिन लड़कियां व्रत करती हैं. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर घर की साफ-सफाई की जाती है. फिर आंगन में विधिपूर्वक करम डाली को गाड़ा जाता है. इसके बाद उस स्थान को गोबर से लिपकर शुद्ध किया जाता है. करमा पर्व के दिन बहने हाथ में टोकरी या थाली लेकर पूजा के लिए आंगन में उस स्थान पर बैठती हैं जहां करम डाली को गाड़ा गया है. इस दौरान करमा या करम राजा की पूजा की जाती है और बहनें प्रार्थना करती हैं कि उनके भाई को जीवन में सुख-समृद्धि और खुशियां मिलें. भाई के मन में कभी कोई गलत विचार न आए और वह गलत रास्ते पर न जाए. यह पूजा गांव के बुजुर्ग कराते हैं और पूजा के बाद करम कथा भी सुनाई जाती है. इसे भी पढ़ें : घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-governor-is-reluctant-to-open-the-envelope-of-election-commission-ramdas/">घाटशिला: चुनाव आयोग का लिफाफा खोलने से कतरा रहे हैं राज्यपाल- रामदास

Leave a Comment