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गालूडीह : क्षेत्र में करमा पूजा की धूम, कई गांव के ग्रामीणों ने किया करमा पूजा

Galudih (Prakash Das) : प्रकृति उपासना का पर्व करमा मंगलवार को जोड़िसा पंचायत के कमारिगोड़ा गांव के टोला मातुलडीह में धूमधाम से मनाया गया. ग्रामीणों ने सुख और समृद्धि की कामना की. करम राजा की पूजा करने के लिए ग्रामीणों ने मंगलवार को निर्जला उपवास रखा था. मंगलवार की शाम करम डाली को अखाड़ा स्थल पर स्थापित कर फल-फूल, जौ, धान और बालू के साथ पूजा अर्चना की गई. करमा पर्व को लेकर गालूडीह इलाके में उत्सव का माहौल है. मातुलडीह निवासी इंद्रजीत गोप के घर में करमा पूजा को लेकर विशेष आयोजन किया गया है. इसे भी पढ़ें : चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-mla-laid-foundation-stone-for-pcc-road-construction-work/">चाकुलिया

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बुधवार को किया जाएगा विसर्जन

उनकी पत्नी सबिता गोप ने बताया कि ग्रामीण जंगल से करमा पेड़ की तीन डालियों को काटकर अखाड़े के बीचो-बीच गाड़ते हैं. महिलाएं करम डाली की पूजा अर्चना के लिए ढोल एवं मांदर की थाप पर करमा गीत गाती हुई पूजा स्थल पर पहुंचेंगी. रातभर जागरण होगा साथ ही पारंपरिक वेशभूषा में गीत गाकर समूह नृत्य प्रस्तुत की जाएंगी. वहीं करम डाली लाने के दौरान युवक-युवतियां मांदर की थाप पर थिरकती नजर आईं. इसके साथ ही आज तोरे करम राजा घरे-दुवारे कल तोरे करम राजा शंख लदीर पारे तथा इति इति जावा किया किया जावा जैसे गानों से गांव-गांव गूंजता रहा. बता दें कि बुधवार को करमा डाली की पूजा कर विसर्जित किया जाएगा. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-missing-rythus-body-recovered-from-the-pit-of-the-house/">जमशेदपुर

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ऐसे मनाया जाता है करमा पर्व

करमा पर्व के दिन लड़कियां व्रत करती हैं. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर घर की साफ-सफाई की जाती है. फिर आंगन में विधिपूर्वक करम डाली को गाड़ा जाता है. इसके बाद उस स्थान को गोबर से लिपकर शुद्ध किया जाता है. करमा पर्व के दिन बहने हाथ में टोकरी या थाली लेकर पूजा के लिए आंगन में उस स्थान पर बैठती हैं जहां करम डाली को गाड़ा गया है. इस दौरान करमा या करम राजा की पूजा की जाती है और बहनें प्रार्थना करती हैं कि उनके भाई को जीवन में सुख-समृद्धि और खुशियां मिलें. भाई के मन में कभी कोई गलत विचार न आए और वह गलत रास्ते पर न जाए. यह पूजा गांव के बुजुर्ग कराते हैं और पूजा के बाद करम कथा भी सुनाई जाती है. इसे भी पढ़ें : घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-governor-is-reluctant-to-open-the-envelope-of-election-commission-ramdas/">घाटशिला

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कर्मा और धर्मा दोनों भाईयों ने अपनी बहन को दुश्मनों से बचाया था

मान्यताओं के अनुसार इस पर्व के पीछे एक कथा है. प्राचीन कथाओं के अनुसार बताया जाता है कि कर्मा और धर्मा दो भाई हुआ करते थे. दोनों ही भाई अपनी छोटी बहन से बेहद प्यार करते थे. उनकी छोटी बहन अक्सर भगवान की पूजा भक्ति किया करती थी और साथ ही करम पौधे की पूजा किया करती थी. बताया जाता है कि एक बार कुछ दुश्मनों ने गांव पर हमला कर दिया. जिसके बाद दोनों भाईयों ने बड़ी ही बहादुरी के साथ अपनी बहन को उन दुश्मनों से बचाया था. जिसके बाद कर्मा-धर्मा की बहन ने खुश होकर दोनों भाइयों के लिए करम पौधे के पूजा की थी और अपने भाईयों के लिए धन, सुख समृद्धि की मांग की थी. जिससे वह लोग काफी अमीर हो गए. तभी से यह करम पूजा होती आ रही है. जिसमें बहनें अपने भाइयों के लिए सारा दिन उपवास रखती है और उनकी सुख समृद्धि के लिए पूजा करती हैं. [wpse_comments_template]

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