Ranchi: वर्ष 2015 में गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव और उनके गुर्गों की हत्या मामले में सजायाफ्ताओं को झारखंड हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने विकास तिवारी सहित पांचों बरी हुए लोगों को नोटिस जारी किया है.
पीड़ित पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया है कि हाईकोर्ट ने अभियोजन के गवाहों (पुलिस कर्मी) की गवाही को नजरअंदाज किया है और फैसला दे दिया.
दरअसल, झारखंड हाईकोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को मामले के सजायाफ्ता विकास तिवारी सहित पांचों की सजा के खिलाफ अपील पर फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय एवं न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने विकास तिवारी सहित पांचों सजायफ्ताओं की अपील स्वीकृत कर लिया था.
इन्हें बरी करने का आदेश दिया था. विकास तिवारी, संतोष पांडे, विशाल कुमार सिंह, राहुल देव पांडे और दिलीप साव की ओर से हजारीबाग की निचली अदालत द्वारा दी गई सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दाखिल कर चुनौती दी गई थी.
हजारीबाग सिविल कोर्ट ने सुनाया था फैसला
हजारीबाग सिविल कोर्ट ने वर्ष 2020 में मामले में विकास तिवारी और संतोष पांडे को आजीवन उम्र कैद की सजा सुनाई थी. वहीं विशाल कुमार, राहुल देव पांडे और दिलीप साव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.
साथ ही इनपर अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अर्थदंड भी लगाया था. बता दें कि हजारीबाग सदर कांड संख्या 610/2015 से संबंधित इस मामले में 7 लोगों को आरोपी बनाया गया था. जिसमें से 5 लोग दोषी पाए गए थे. एक आरोपी शंभू तिवारी साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था.
2015 में हुई थी सुशील श्रीवास्तव की हत्या
2 जून 2015 की सुबह 11:00 बजे गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव और उनके दो अन्य को जेपी कारागार से पेशी के लिए हजारीबाग सिविल कोर्ट लाया गया था. जहां पहले से घात लगाए अपराधकर्मियों ने एके -47 राइफल से कोर्ट परिसर में प्रवेश किया. सुशील श्रीवास्तव के कोर्ट पहुंचते ही अंधाधुंध फायरिंग की गई. जिससे कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई. अपराधियों की गोली से सुशील श्रीवास्तव, ग्यास खान और कमाल खान बुरी तरह से घायल हो गए. जिन्हें अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.


Leave a Comment