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गिरिडीह : जेनेरिक दवा स्टोर 2 साल से बनकर तैयार, लेकिन दवाओं का कोई अता-पता नहीं

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Abhay Verma Giridih : स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर किस तरह आम लोगों के साथ मज़ाक किया जा रहा है. इसकी एक बानगी गिरिडीह सदर अस्पताल में बने जेनेरिक दवा स्टोर के कमरे को देखकर समझी जा सकती है. दो साल पहले राज्य सरकार ने जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जेनेरिक दवा स्टोर खोलने का निर्देश दिया था. जिसके बाद गिरिडाह सदर अस्पताल के मुख्य गेट के पास ही जेनरिक दवा स्टोर के लिए कमरे का निर्माण करवाया गया. कमरा बन गया लेकिन कमरे में अब तक दवाई नहीं पहुंची. जिसके कारण लोगों को अब भी महंगी दवाईयां लेने को मजबूर होना पड़ रहा है.

पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर नहीं प्रबंधन

जन औषधि केन्द्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा है. इसके बावजूद सदर अस्पताल प्रबंधन इसे लेकर गंभीर नहीं है. सदर अस्पताल में सबसे पहले साल 2012 में राज्य के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हेमलाल मुर्मू ने जेनेरिक दवा के लिए काउंटर का उद्घाटन किया था. लेकिन थोड़े समय बाद ही काउंटर बंद हो गया. कुछ साल बाद फिर से जेनेरिक दवा काउंटर की शुरुआत की गई. लेकिन वो भी चंद दिनों में ही दम तोड़ दिया.

डॉक्टरों पर मनमानी के आरोप

सदर अस्पताल के चिकित्सकों पर मनमानी के आरोप लगते रहे हैं. लोगों का कहना है कि सदर अस्पताल में दो बार जेनेरिक दवा काउंटर की शुरुआत हुई. लेकिन डॉक्टरों ने ब्रांडेड दवा के आगे जेनेरिक दवा को तरज़ीह नहीं थी. डॉक्टर सिर्फ ब्रांडेड दवा ही लिखते रहे. जिसके कारण जेनेरिक दवा काउंटर की ये हालत हुई.

गरीब मरीज़ होते हैं परेशान

जेनेरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती है. जन औषधि केंद्र के तहत मरीजों को सामान्य बीमारियों के अलावा रक्तचाप, ब्लड शुगर, हृदय रोग सहित अन्य बीमारियों की दवाएं सस्ती कीमत पर मिलती है. लेकिन अस्पताल में जन औषधि केन्द्र ना रहने के कारण मरीज़ महंगी दवाएं खरीदनें को मजबूर हैं.

टेंडर में किसी ने नहीं लिया भाग - सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ.एसपी मिश्रा ने कहा बीते साल जेनेरिक दवा के लिए टेंडर निकाली गई. पर किसी ने भाग नहीं लिया. इसके कारण गिरिडीह ज़िले में कहीं भी सरकारी चिकित्सा संस्थान में जेनेरिक दवा का कोई कॉन्टर नहीं है. कहा कि योजना सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जेनेरिक दवा काउंटर खोलने की थी. पर सरकार की ओर से अब तक इस मामले में कोई पहल नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि राज्य में मात्र रिम्स में ही जेनेरिक दवा का काउंटर है. यह">https://lagatar.in/giridih-threat-to-the-existence-of-giridihs-lifeline-argaghat-bridge/">यह

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