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जागरुकता का मुख्य माध्यम नियमित रूप से प्रशिक्षण एवं कार्यशाला
समापन समारोह को संबोधित करते हुए रिम्स निदेशक डॉ कामेश्वर प्रसाद ने कहा कि तत्कालीन आधुनिक समय में मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों के अलावा समाज में भी अनुसंधान मानसिकता की आवश्यकता है. जागरुकता का मुख्य माध्यम नियमित रूप से प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का आयोजन है. डॉ प्रसाद ने कहा कि यह परियोजना तीन वर्षों के लिए है. जिसमें एक बैच इस वर्ष -2022 के प्रशिक्षण में 32 प्रभागियों को फेलोशिप प्रदान की गयी. इस फेलोशिप प्रोग्राम को सफल बनाने में 14 रिम्स के मेंटर एवं दो राष्ट्रीय स्तर के मेंटर एम्स नई दिल्ली के पूर्व प्राध्यापक बायोस्टैटिक्स डॉ एसएन द्विवेदी एवं प्रो. शान्तनुके त्रिपाठी,डीन (एकेडमिक) एंड एचओडी फार्माकोलॉजी, नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज की अहम भूमिका रही. रिम्स निदेशक ने कहा कि यह गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस कराया जाने वाला देश का सबसे लंबा एवं विस्तृत फेलोशिप प्रोग्राम है. इस जीसीपी प्रोजेक्ट के प्रिसिंपल इन्वेस्टीगेटर रिम्स निदेशक डॉ कामेश्वर प्रसाद के अलावा को- इनवेस्टीगेटर डॉ एसबी एवं डॉ अर्पिता राय है. इसे भी पढ़ें – संदीप">https://lagatar.in/this-is-how-sandeep-thapa-became-a-notorious-criminal-of-ranchi-read/">संदीपथापा ऐसे बन गया रांची का कुख्यात अपराधी, पढ़ें… [wpse_comments_template]

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