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रांचीः सरकार ने दो साल से राइस मिलरों को नहीं किया भुगतान,132 करोड़ है बकाया

Ranchi: सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीदारी करती है. इस योजना को सफल बनाने के पीछे सीएमआर का कार्य करने वाले राइस मिलरों का सबसे बड़ा योगदान होता है. मिलर ही किसानों से खरीदे गये धान की मिलिंग करते हैं, धान एवं सीएमआर के परिवहन का काम करते हैं, लेकिन राइस मिलरों को पिछले 2 साल से सीएमआर के कार्य का भुगतान नहीं किया गया है. इससे मिलरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सरकार पर मिलरों का करीब 132 करोड़ रुपए बकाया है. सरकार को 2023-23 के सेकेंड अनुपूरक बजट के माध्यम से यह राशि मिल गई है, लेकिन अभी तक भुगतान शुरू नहीं हुआ है. उम्मीद जताई जा रही है कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही मिलरों को भुगतान कर दिया जाएगा. इसे पढ़ें- प्रधानमंत्री">https://lagatar.in/pm-modi-inaugurates-sela-tunnel-in-arunachal-says-congress-has-played-with-the-countrys-security/">प्रधानमंत्री

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केंद्र से प्रतिपूर्ति राशि नहीं मिलने के कारण भुगतान लंबित

मिलिंग और सीएमआर के परिवहन शुल्क का भुगतान झारखंड खाद्य निगम से प्राप्त राशि से की जाती है, जबकि इस राशि की प्रतिपूर्ति भारतीय खाद्य निगम से प्राप्त होती है. राज्य सरकार ने वर्ष 2020-21 और 2021-22 में सीएमआर कार्य के बदले में राज्य के सभी जिलों के मिलरों को 20 करोड़ 41 रुपये का भुगतान किया गया है, वहीं धान परिवहन के मद में 57,68,11,391 रुपये का भुगतान किया गया है, लेकिन भारतीय खाद्य निगम से प्रतिपूर्ति राशि प्राप्त नहीं होने के कारण अब भुगतान लंबित हो गया है. इसे भी पढ़ें- रांची">https://lagatar.in/a-person-sleeping-in-a-house-in-budhmu-was-shot-dead-police-engaged-in-investigation/">रांची

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भारतीय खाद्य निगम से मिले मात्र 71.63 लाख

झारखंड के खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग का कहना है कि 2020 से 2022 तक राज्य सरकार की ओर से कुल 68,09,37,628 रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि भारतीय खाद्य निगम से सिर्फ 71,63,039 रुपये ही प्रतिपूर्ति राशि के रूप में प्राप्त हो पाया है. प्रतिपूर्ति राशि नहीं मिलने के कारण मिलरों का पिछले साल का परिवहन शुल्क का भुगतान बाकी है. इसके लिए अनुपूरक बजट से 132 करोड़ रुपये फंड मिल चुके हैं. [wpse_comments_template]  

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