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जून-जुलाई के बीच नगर निकाय चुनाव करा सकती है सरकार

हाइकोर्ट के कड़े रुख के बाद सरकार हुई रेस, ट्रिपल टेस्ट को लेकर राज्य पिछड़ा आयोग कर चुका है तीन-चार बैठक

Kaushal Anand Ranchi :  झारखंड सरकार जून-जुलाई के बीच में राज्य में नगर निकाय चुनाव करवा सकती है. राज्य पिछड़ा आयोग ने इस बात के संकेत दिये हैं. हाइकोर्ट के कड़े रूख के बाद सरकार और आयोग रेस हो गये हैं. राज्य पिछड़ा आयोग पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्ट की तैयारी में जुट गया है. आयोग ने संकेत दिये हैं कि राज्य में जैसे ही आदर्श आचार संहिता समाप्त होगी, आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी. इसके बाद राज्य में नगर निकाय चुनाव का रास्ता साफ हो जायेगा.

हाइकोर्ट ने अपने पुराने आदेश में रोक लगाने से कर दिया  इनकार

झारखंड हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 8 अप्रैल को हुई सुनवाई में सिंगल बेंच के 4 फरवरी को दिये उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार को तीन हफ्ते में निकाय चुनाव की घोषणा करने का आदेश दिया था. अदालत ने कहा था कि ट्रिपल टेस्ट का बहाना बनाकर सरकार निकाय चुनाव रोक नहीं सकती है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयोग हर मंगलवार को ट्रिपल टेस्ट को लेकर बैठक कर रहा है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी नगर निकाय क्षेत्र में ओबीसी को आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्ट कराने का आदेश दिया है. ऐसे में अब सरकार के पास निकाय चुनाव कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बच रहा है. इसलिए सरकार ने  राज्य निर्वाचन आयोग को जल्द ट्रिपल टेस्ट कराने के लिए मौखिक निर्देश दिया है. ताकि लोकसभा चुनाव के बाद जून से जुलाई के बीच नगर निकाय चुनाव कराया जा सके.

पिछले साल अप्रैल में समाप्त हो चुका है नगर निकायों का कार्यकाल

बता दें कि रांची सहित राज्य के सभी नगर निकायों का कार्यकाल बीते वर्ष अप्रैल में समाप्त हो चुका है.  राज्य निर्वाचन आयोग  को कार्यकाल समाप्त होने तक चुनाव करा लेना था. इसकी तैयारी भी कर ली गयी थी. लेकिन आजसू पार्टी के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नगर निकाय क्षेत्र में ओबीसी को आरक्षण देने के लिए ट्रिपल टेस्ट कराने का आदेश दिया. जिसकी वजह से चुनाव फिर से टल गया.

चुनाव नहीं होने से हो रहे हैं ये नुकसान

झारखंड में नगर निकायों का चुनाव नहीं होने से राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हो रहा है. लेकिन चुनाव कराने में विलंब होने के कारण सरकार को 15वें वित्त आयोग की मदद से वंचित होना पड़ सकता है. झारखंड सरकार के अनुसार, वित्त आयोग से झारखंड में शहरी निकायों के विकास के लिए 1600 करोड़ की सहायता राशि मिलनी है. लेकिन तय समय पर चुनाव नहीं होने से वित्त आयोग इस पर रोक लगा सकती है. बता दें कि शहरी विकास, शहरों में नागरिक सुविधा विकसित करने औप अपने संसाधन को बढ़ाने के लिए नगर निकायों के लिए केंद्र सरकार द्वारा वित्त आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर राज्यों को ग्रांट स्वीकृत की जाती है.

क्या कहते हैं झारखंड राज्य पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद 

झारखंड राज्य पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि आयोग युद्धस्तर पर निकाय चुनाव की तैयारी कर रहा है, ताकि समय पर ट्रिपल टेस्ट हो जाये. इसके लिए हर मंगलवार को आयोग की बैठक भी हो रही है. ट्रिपल टेस्ट का जातिगत सर्वेक्षण से कोई लेना-देना नहीं है. क्योंकि जातिगत सर्वेक्षण पूरे राज्य एवं सभी जातियों का होगा. जबकि ट्रिपल टेस्ट केवल शहरी निकाय में बसे पिछड़ों का होगा. आयोग शत-प्रतिशत प्रयास करेगा कि आचार संहिता खत्म होते ही सरकार को रिपोर्ट सौंप दें. इसके बाद सरकार कभी भी चुनाव करा सकती है.

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