Search

 
 
 

सफाई मोहर्रिर का पद सृजित व नियमित करने पर विचार करे सरकार: हाइकोर्ट

Ranchi News: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केवल इस आधार पर कि संबंधित कर्मचारी 2015 की नियमितीकरण नियमावली और उसके 2019 के संशोधन के तहत नियमितीकरण के दायरे में नहीं आते, उनके नियमितीकरण के दावे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति विज्ञापन के बाद हुई थी.
 
फाइल फोटो

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका के सेटलमेंट कार्यालय में लंबे समय से कार्यरत 8 सफाई मोहर्रिर (याचिकाकर्ताओं) के नियमितीकरण के मामले में राज्य सरकार को उनके काम की निरंतरता और आवश्यकता का आकलन कर पद सृजित करने व उसके बाद नियमितीकरण के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया है. 


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केवल इस आधार पर कि संबंधित कर्मचारी 2015 की नियमितीकरण नियमावली और उसके 2019 के संशोधन के तहत नियमितीकरण के दायरे में नहीं आते, उनके नियमितीकरण के दावे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति विज्ञापन के बाद हुई थी और वे 20 वर्ष से अधिक समय से भूमि अभिलेख तैयार करने के कार्य में लगे हुए हैं. हाइकोर्ट ने याचिका निष्पादित कर दिया.

इसे भी पढ़ें - 

 

दरअसल याचिकाकर्ताओं ने 6 अप्रैल 2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें दुमका के डिप्टी कलेक्टर (स्थापना) ने नियमितीकरण की अनुशंसा यह कहते हुए लौटा दी थी कि जिस पद पर वे कार्यरत हैं, वह स्वीकृत पद नहीं है, राज्य सरकार ने भी अदालत में यही दलील दी कि बिना स्वीकृत पद के नियमितीकरण नहीं किया जा सकता है.


अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता दैनिक मजदूर के रूप में नहीं, बल्कि पीस रेट के आधार पर कार्य कर रहे थे, वर्ष 2014 के सरकारी निर्णय के तहत उनके काम के लिए पीस रेट तय किया गया था. अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ताओं में कुछ की नियुक्ति 1992, कुछ की 1997 और तीन की 2001 में विज्ञापन एवं चयन प्रक्रिया के बाद हुई थी.


20 साल से काम लेने के बाद केवल स्वीकृत पद नहीं होने का आधार पर्याप्त नहीं 

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Nihal Singh मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य दशकों तक किसी से काम लेने के बाद यह कहकर नियमितीकरण से इनकार नहीं कर सकता कि स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं हैं. स्वीकृत पदों का सृजन राज्य को आवश्यकता का तार्किक आकलन कर करना होता है.


अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति विज्ञापन के माध्यम से हुई थी और वे दो दशक से अधिक समय से भूमि अभिलेखों के रखरखाव जैसे कार्य में लगे हैं, उनके कार्य की प्रकृति भी स्थायी आवश्यकता वाली प्रतीत होती है.


हालांकि  अदालत ने सीधे नियमितीकरण का आदेश नहीं दिया, उसने स्पष्ट किया कि पदों का सृजन और स्वीकृति राज्य सरकार के नीति क्षेत्र का विषय है इसलिए पहले राज्य सरकार को इस पहलू पर विचार करना होगा.

 

तीन महीने में जानकारी देने का निर्देश

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने द्वारा किए गए कार्य, उसकी निरंतरता और समय-समय पर प्राप्त भुगतान से संबंधित आवश्यक जानकारी तीन महीने के भीतर दुमका के बंदोबस्त पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें.


बंदोबस्त पदाधिकारी प्राप्त जानकारी का सत्यापन कर उसे दो महीने के भीतर राज्य सरकार के संबंधित अधिकारी को भेजेंगे. इसके बाद राज्य सरकार को सत्यापित जानकारी प्राप्त होने के चार महीने के भीतर यह निर्णय लेना होगा कि संबंधित कार्य की निरंतरता और आवश्यकता को देखते हुए पदों का सृजन किया जाए या नहीं और पद सृजित होने की स्थिति में याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण के दावे पर विचार किया जाए.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

 

 

 

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही