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तेतुलिया वनभूमि घोटाला: बर्खास्त CO  ने अपने ही बैंक अकाउंट में ली थी घूस

Ranchi News: निर्मल कुमार टोप्पो वर्ष 1996 में राज्य प्रशासनिक सेवा में आया. वह बोकारो जिले के चास अंचल में अंचल अधिकारी के पद पर दो बार पदस्थापित रहा है. पहली बार वह चास में अंचल अधिकारी के रूप में वर्ष 2010 से 2013 तक काम किया. इसके बाद उसका तबादला हो गया. लेकिन उसने चास के अंचल अधिकारी के पद पदस्थापित होने में दूसरी बार कामयाबी हासिल की. दूसरी बार वह 2014 से 2016 तक चास के अंचल अधिकारी के पद पर पदस्थापित रहा.
 
AI की मदद से तैयार सांकेतिक तस्वीर.
  • निर्मल कुमार टोप्पो बोकारो जिले के चास अंचल में अंचल अधिकारी के पद पर दो बार पदस्थापित रहा.

Ranchi News: बोकारो जिला के तेतुलिया वन भूमि घोटाला में बर्खास्त अंचल अधिकारी निर्मल कुमार टोप्पो ने केनरा बैंक के अपने अकाउंट में 4.11 लाख रुपये घूस लिया था. ईडी द्वारा की गयी पूछताछ के दौरान उसने यह रकम CO के रूप में काम करने दौरान घूस में लेने की बात स्वीकार की थी. राज्य सरकार ने उसे तेतुलिया वनभूमि का म्यूटेशन अख्तर हुसैन के नाम पर करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया है.

 

निर्मल कुमार टोप्पो वर्ष 1996 में राज्य प्रशासनिक सेवा में आया. वह बोकारो जिले के चास अंचल में अंचल अधिकारी के पद पर दो बार पदस्थापित रहा है. पहली बार वह चास में अंचल अधिकारी के रूप में वर्ष 2010 से 2013 तक काम किया. इसके बाद उसका तबादला हो गया. लेकिन उसने चास के अंचल अधिकारी के पद पदस्थापित होने में दूसरी बार कामयाबी हासिल की. दूसरी बार वह 2014 से 2016 तक चास के अंचल अधिकारी के पद पर पदस्थापित रहा.


उसने अपने दूसरे पदस्थापन के दौरान फर्जी दस्तावेज के आधार पर इजहार अंसारी के नाम पर तेतुलिया मौजा की वनभूमि का म्यूटेशन किया. वर्ष 2012 में इजहार अंसारी ने उसे एक आवेदन दिया. इसमें उसने तेतुलिया की 103 एकड़ जमीन की जमाबंदी अपने नाम करने का अनुरोध किया था. आवेदन के साथ उसने 1933 का एक सेल सर्टिफिकेट लगाया था. इस सर्टिफिकेट में समीर महतो द्वारा नीलामी में जमीन खरीदे जाने का उल्लेख था.


टोप्पो ने इजहार अंसारी द्वारा दिये गये आवेदन को जांच के लिए कर्मचारी को दे दिया. कर्मचारी की रिपोर्ट के आधार पर उसने इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन के नाम से जमाबंदी कायम कर दी. इन दोनों के नाम पर जमाबंदी संख्या 1665 खोलने के बाद लगान रसीद जारी कर दिया गया. इस प्रक्रिया के दौरान इजहार हुसैन के अलावा शैलेश कुमार सिंह भी उससे चार-पांच बार मिले थे.


इजहार हुसैन द्वारा दिये गये आवेदन के साथ लगे नीलामी के दस्तावेज की जांच के लिए वह तीन बार पुरूलिया गया था. लेकिन उसने इसकी जानकारी राज्य सरकार को नहीं दी थी. इसके अलावा उसने पुरुलिया आने जाने के लिए यात्रा भत्ता भी सरकार से नहीं लिया था. इससे यह पता चलता है कि वह इजहार हुसैन या शैलेष सिंह के खर्चे पर जांच के लिए पुरुलिया स्थित रजिस्ट्री कार्यालय गया था.  


पुरुलिया स्थित रजिस्ट्री कार्यालय की जांच के दौरान उसने सिर्फ उस रजिस्टर को देखा, जिसमें 1933 के दस्तावेज के लिखे होने का उल्लेख था. जांच के दौरान उसने इंडेक्स-I, इंडेक्स-II या थम्ब इंडेक्स रजिस्टरों को नहीं देखा. इसके अलावा उसने पुरुलिया रजिस्ट्री कार्यालय के वरीय अधिकारियों के बात भी नहीं की.


जांच के दौरान निर्मल टोप्पो के केनरा बैंक के अकाउंट नंबर 74512XXXXXXX94 में 4.11 लाख रुपये नकद जमा पाया गया. पूछताछ के दौरान उसने यह स्वीकार किया कि यह रकम उसने घूस के रूप में ली थी. उसके खाते में 50 हजार और 49 हजार की दो डिपोजिट के बारे में वह कुछ भी बताने में असमर्थ रहा. हालांकि बैंक के दस्तावेज की जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि यह रकम नईम अख्तर नाम के व्यक्ति ने दी थी.


तेतुलिया स्थित वनभूमि का म्यूटेशन होने की शिकायत मिलने के बाद राज्य सरकार ने एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था. समिति की रिपोर्ट में गलत तरीके से इजहार अंसारी व अन्य के नाम पर म्यूटेशन करने के आरोपों के सही पाते हुए तत्कालीन CO निर्मल टोप्पो को बर्खास्त करने की अनुशंसा की थी. इसके बाद सरकार ने उसे बर्खास्त कर दिया था.

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