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तेतुलिया की जमीन हड़पने के लिए साक्षर आदमी के अंगूठे का निशान लगा कर गिफ्ट डीड बनाया गया

Ranchi : तेतुलिया की 103 एकड़ जमीन हड़पने के लिए साक्षर आदमी के अंगूठा के निशान लगा कर गिफ्ट डीड तैयार किया गया. जमीन हड़पने के लिए बड़े पैमाने पर जालसाजी की गई. इसमें अधिकारी भी शामिल रहे. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाईकोर्ट में दायर शपथ पत्र में इस बात का उल्लेख किया है.

 

इजहार अंसारी से जमीन खरीदने वाले शैलेश सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले में दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया है. फिलहाल इस वनभूमि की खरीद-बिक्री के मामले में CID जांच चल रही है. ईडी भी इस मामले में ECIR दर्ज करने के बाद जांच कर रही है.

 

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईडी को शपथ पत्र दायर कर अपना पक्ष पेश करन का निर्देश दिया था. इसके आलोक में ईडी ने कोर्ट में शपथ पत्र दायर किया. साथ ही इस जमीन की खरीद बिक्री में हुई जालसाजी का उल्लेख करते हुए शैलेश सिंह की याचिका रद्द करने और मामले में ट्रायल चलाने का अनुरोध किया.

 

ईडी की ओर से दायर शपथ पत्र में कहा गया है कि शैलेश सिंह की ओर से यह याचिका एक सोची समझी रणनीति के तहत दायर की गई है. इसमें सही तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया है. ईडी ने अपने शपथ पत्र में कहा है कि यह एक गंभीर मामला है. इसमें बड़े पैमाने पर मनी लांड्रिंग की गई है.

 

सरकार के स्तर पर भी मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था. इस समिति ने भी इसे जालसाजी कर वनभूमि की खरीद बिक्री का मामला बताया. समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन अंचल अधिकारी निर्मल कुकर टोप्पो को बर्खास्त किया जा चुका है.

 

ईडी के शपथ पत्र में कहा गया कि इजहार अंसारी वगैरह ने इसे अपने पूर्वज द्‌वारा 1933 में नीलामी में खरीदने का दावा करते हुए दस्तावेज पेश किया है. जांच के दौरान पुरूलिया स्थित रजिस्ट्री कार्यालय में नीलामी से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं मिला. जमीन पर अपनी दावेदारी पेश करने के लिए एक गिफ्ट डीड का सहारा लिया गया है. इस गिफ्ट डीड को 25-11-2024 को तैयार किया गया.

 

यह गिफ्ट डीड निबंधित नहीं है. गिफ्ट डीड पर लगे अंगूठे का निशान इजहार अंसारी के पूर्वज समरुद्दीन के होने का दावा किया गया है. हालांकि जांच में यह पाया गया है कि समरुद्दीन साक्षर थे. किसी साक्षर व्यक्ति द्वारा गिफ्ट डीड पर अंगूठा लगाना संदेहास्पद है. सुनियोजित साजिश के तहत इस जमीन का म्यूटेशन कराने के बाद इसे 10.30 करोड़ रुपये में शैलेश सिंह को बेचा गया. जबकि सर्किल रेट के हिसाब से जमीन की कीमत 38.85 करोड़ रुपये है.

 

इजहार अंसारी से उमायुष मल्टीकॉम नामक कंपनी ने जमीन खरीदी. इस कंपनी का गठन जमीन खरीदने से सिर्फ 18 दिन पहले किया गया था. कंपनी की हिस्सा पूंजी सिर्फ एक लाख रुपये थी. शैलेश सिंह उमायुष मल्टीकॉम नामक कंपनी के नाम खरीदी गई जमीन को को बेचा. उसने 75.38 एकड़ जमीन बेची.

 

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