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स्थानीय नीति विधेयक में राज्यपाल की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करे सरकार : बाबूलाल

 
Ranchi : 1932 का खतियान आधारित स्थानीय नीति वाला विधेयक राजभवन से लौटाये जाने पर भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने हेमंत सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि विधेयक में राज्यपाल की आपत्तियों पर गंभीरतापूर्वक विचार करें, क्योंकि यह मामला झारखंड के साढ़े तीन करोड़ जनता के हित से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें बार-बार राजनीति नहीं होनी चाहिए. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार झारखंड के बच्चों के हित में झारखंड की धरती पर ही विधि-सम्मत निर्णय ले. राज्य सरकार को फेंका-फेंकी की राजनीति बंद कर अपने संविधान सम्मत अधिकारों का सदुपयोग करना चाहिए. राज्य सरकार को नीति बनाने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपराधियों को बचाने के लिए उनके मुकदमों की बहस के लिए महंगे वकीलों पर करोड़ों रुपए पानी की तरह खर्च कर रही, जबकि स्थानीय नीति का मामला तो राज्य के हित से जुड़ा है, इसलिए इस मामले में देश के नामी कानूनविदों, वकीलों को महंगी फीस देकर सलाह लेने से राज्य सरकार को परहेज नहीं करना चाहिए. इसे भी पढ़ें : भारत">https://lagatar.in/rahul-said-at-the-end-of-bharat-jodo-yatra-i-dont-even-have-my-own-house-our-forefathers-sacrificed/">भारत

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