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ग्रीनलैंड का मामला :  फ्रांस ने अमेरिका को चेताया, उत्तरी अटलांटिक महासागर में एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गॉल भेजा

 Paris : ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों और अमेरिका के बीच ठन गयी है.अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की जिद पर अड़े हैं. ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ यूरोपीय देश एकजुट होते नजर आ रहे हैं. ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी जैसे ताकतवर यूरोपीय देशों ने अमेरिका को ग्रीनलैंड को लेकर चेतावनी दी है.  


खबरों के अनुसार अमेरिका को खुली चेतावनी देने वाले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने ग्रीनलैंड के पास उत्तरी अटलांटिक महासागर में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गॉल को भेज दिया है.  इस पर राफेल फाइटर जेट तैनात हैं.  


समाचार एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी कि यह उत्तरी अटलांटिक की ओर बढ़ रहा है. हाल के दिनों में यह इलाका अमेरिका और यूरोप के बीच भूराजनीतिक तनाव का केंद्र बना है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार नेवल एयर ग्रुप ओरियन 26 सैन्य अभ्यास में शामिल होने तोउलोन नौसैनिक अड्डे से रवाना कर दिया गया है.


फ्रांस के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में चार्ल्स डी गॉल और उसके विमान, साथ ही कई एस्कॉर्ट और सपोर्ट जहाज शामिल हैं. इसमें एक डिफेंस फ्रिगेट, एक सप्लाई शिप और एक हमलावर पनडुब्बी है. यह अभ्यास ऐसे समय में किया जा रहा है,


जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्तशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड को लगातार अमेरिका में शामिल करने  धमकी दे रहे हैं.   ट्रंप के रुख से 32 देशों की सदस्यता वाले सैन्य संगठन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है.  


नाटो चीफ ने चेतावनी दी है कि बिना अमेरिका के नाटो देश अपनी रक्षा नहीं कर पायेंगे. जान लें कि ग्रीनलैंड का प्रशासन डेनमार्क के पास है.  वह नाटो का सदस्य देश है. ट्रंप के अनुसार ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत   जरूरी ह. अमेरिका यहां अपना गोल्डन डोम डिफेंस सिस्टम लगाना चाहता है,  ताकि रूस और चीन की मिसाइलों से अमेरिका को बचाया जा सके.   

      

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