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Gulf War : टैंकरों की सुरक्षा के लिए अरब सागर,ओमान की खाड़ी में  नौसेना का ऑपरेशन संकल्प

अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच जारी युद्ध का दायरा अब स्टेट ऑफ होर्मूज से आगे बढ़कर ओमान की खाड़ी तक फैल गया है. भारत पर इसके असर के संदर्भ की बात करें तो  भारतीय नौसेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर है.
 

New Delhi : अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच जारी युद्ध का दायरा अब स्टेट ऑफ होर्मूज से आगे बढ़कर ओमान की खाड़ी तक फैल गया है. भारत पर इसके असर के संदर्भ की बात करें तो  भारतीय नौसेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर है.

 

खबरों के अनुसार तेल- गैस की आपूर्ति सुरक्षित और निर्बाध रहे, इसके लिए भारतीय नौसेना ने अरब सागर सहित ओमान की खाड़ी तक अपने युद्धपोतों की तैनाती और बढ़ा दी है.

 

अहम बात यह है कि भारतीय युद्धपोत इस क्षेत्र में पूर्व से ही लगातार गश्त लगाते रहे है. लेकिन बदलते परिदृश्य में पूरे इलाके में भारत सरकार ने निगरानी और तेज कर दी है.

 

जान लें कि पूर्व में स्टेट ऑफ होर्मूज  संकट  बढ़ जाने के कारण इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना के तीन युद्धपोत भारतीय झंडा वाले जहाजों को आगे तक सुरक्षित जाने के लिए एस्कार्ट करते रहे हैं.

 

सूत्रों के अनुसार अब इस इलाके नौसेना के कम से 6 -8 युद्धपोत गश्त लगा रहे हैं कि भारतीय तेल टैंकर और कार्गो जहाज पर कोई हमला करने का दुस्साहस न कर सके.

 

गश्त लगा रहे इन युद्धपोतों में  डिस्ट्रायर से लेकर फ्रिगेट तक शामिल है.  य़ह कदम होर्मूज  जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय  जहाजों को सुरक्षित रास्ता प्रदान करने के लिए ऑपरेशन संकल्प के तहत उठाया गया है

 

सभी युद्धपोत रडार, सैटेलाइट और अन्य निगरानी सिस्टम से लैस हैं. इन जहाजों में ब्रह्मोस औप बराक मिसाइलो भी लगी हुई हैं.ये होर्मूज से आगे उत्तर पश्चिम अरब सागर में भारतीय टैंकरो को एस्कार्ट कर रहे हैं.

 

दरअसल भारतीय नौसेना एकमात्र नौसेना है, जो अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिये अकेले ऑपरेशन चला रही है.

 

अहम बात यह है कि भारत किसी भी सैन्य गठबंधन शामिल नहीं है.खाड़ी युद्ध में भारत अमेरिका-इजरायल या ईरान के साथ खड़ा होना दिखना नहीं चाहता.

 

भारत इसी कवायद में है कि एलपीजी और क्रूड ऑयल खाड़ी देशों से सुरक्षित भारत पहुंच जाये. इसके लिए भारत युद्धपोतों के  साथ ड्रोन और निगरानी विमान का इस्तेमाल पूरे इलाके में कर रहा है

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