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Gumala News: विकास से दूर 'घोड़ा पहार' गांव, बीमारों को बंहगी पर ढोने को मजबूर, सड़क-पानी तक नहीं

गुमला जिला बने 41 वर्ष पूरे हो चुके हैं, वहीं झारखंड राज्य भी अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रजत जयंती मना चुका है. नेता और अधिकारी बड़े-बड़े मंचों से विकास के दावे करते हैं, लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत आज भी बेहद दर्दनाक है.
 

Raidih: गुमला जिला बने 41 वर्ष पूरे हो चुके हैं, वहीं झारखंड राज्य भी अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रजत जयंती मना चुका है. नेता और अधिकारी बड़े-बड़े मंचों से विकास के दावे करते हैं, लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत आज भी बेहद दर्दनाक है. विकास की लकीर आज भी कई गांवों के लिए अछूती है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण गुमला जिले के रायडीह प्रखंड अंतर्गत सुरसांग पंचायत का 'घोड़ा पहार' गांव है


यह गांब आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. करीब 30 घरों की आबादी वाले इस आदिवासी बहुल गांव के लोग आदिम युग जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पूरे गांव में पीने के पानी के लिए एकमात्र कुआं है. गर्मी हो या बरसात, इस कुएं का पानी बहुत जल्दी दूषित हो जाता है. कोई अन्य विकल्प न होने के कारण ग्रामीण इसी गंदे और दूषित पानी को पीने के लिए विवश हैं, जिससे गांव में हमेशा जलजनित बीमारियों का खतरा बना रहता है. 


इतना ही नहीं, कुएं में पानी कम होने के कारण महिलाओं को पानी भरने के लिए घंटों अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ता है. सुरसांग मुख्य पथ से घोड़ा पहार गांव की दूरी मात्र 1 किलोमीटर है, लेकिन यह पूरी सड़क कच्ची है. बरसात के दिनों में पहाड़ों से उतरने वाला पानी इस रास्ते को पूरी तरह बहा ले जाता है, जिससे सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं. 


स्थिति इतनी बदतर हो जाती है कि गांव में मोटरसाइकिल तक ले जाना दूभर हो जाता है. ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा "बरसात के दिनों में अगर गांव का कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हो, तो गांव तक एम्बुलेंस नहीं आ पाती. मजबूरन मरीजों को बहंगी पर लादकर 1 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पैदल ले जाना पड़ता है. 

 

मूलभूत सुविधा की सुध लेने वाला कोई नहीं है. "गांव की बदहाली का आलम सिर्फ सड़क और पानी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में भी भारी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है. गांव की कई बेसहारा महिलाएं विधवा पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि मृत पतियों का 'मृत्यु प्रमाण पत्र' नहीं बनने के कारण उनका विधवा पेंशन का आवेदन अटका हुआ है.

 

फॉर्म जमा किए जाने के बावजूद महीनों से उन्हें ब्लॉक का चक्कर लगवाया जा रहा है, लेकिन प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जा रहा. इस संबंध में घोड़ा पहार गांव के समस्त ग्रामीणों ने गुमला के उपायुक्त को एक मांग पत्र सौंपकर गांव में यथाशीघ्र पेयजल के लिए जलमीनार निर्माण और 1 किलोमीटर लंबी सड़क के कालीकरण की मांग की है. 


इसके साथ ही, मृत्यु प्रमाण पत्र और पेंशन से जुड़े मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने की अपील की गई है. ग्रामीणों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं पर संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे.

 

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