- बिना लाइसेंस बिक रहा था पानी
- खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने किया निरीक्षण
- जांच के लिए भेजा पानी का सैंपल
- गंदगी समेत कई अनियमितताएं मिलीं
Gumla News: सदर अस्पताल परिसर में संचालित सृष्टि प्राण प्रवाह आरओ वॉटर प्लांट की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों समेत आसपास के लोग इस उम्मीद में यहां से फिल्टर पानी खरीदकर पीते हैं कि उन्हें शुद्ध और सुरक्षित पानी मिल रहा है. लेकिन प्लांट के निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति ने पानी की गुणवत्ता और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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आरओ प्लांट में पानी की शुद्धता की जांच के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आई. निरीक्षण के दौरान पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए टीडीएस मीटर अथवा अन्य आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध नहीं पाया गया. वहीं, पानी को फिल्टर करने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे. प्लांट परिसर में जगह-जगह पानी और गंदगी दिखाई दी. इसके अलावा पानी में मच्छर भी देखे गए.
इसी दौरान गुमला के खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी भी मौके पर पहुंचे और प्लांट का निरीक्षण किया. जांच के दौरान उन्होंने प्लांट संचालक से पानी की गुणवत्ता, लाइसेंस और अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित जानकारी मांगी. बताया गया कि प्लांट के पास पानी बिक्री से संबंधित आवश्यक लाइसेंस भी नहीं पाया गया.
मरीजों को प्लास्टिक की बाल्टी में गर्म पानी देने का आरोप
निरीक्षण के दौरान गर्म पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल सामने आए. खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी के अनुसार, मरीजों को दिया जाने वाला गर्म पानी प्लास्टिक की बाल्टी में इलेक्ट्रिक रॉड के माध्यम से गर्म किया जाता है. उन्होंने इसे स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित नहीं बताया.
जनरेटर और साफ-सफाई की व्यवस्था पर भी सवाल प्लांट परिसर में एक जनरेटर भी पाया गया, जिसका समय-समय पर संचालन किया जाता है.
निरीक्षण के दौरान परिसर की साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई. ऐसे में जिस स्थान से अस्पताल के मरीजों और आम लोगों को पीने के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, वहां स्वच्छता के मानकों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है.
लैब जांच से सामने आएगी पानी की गुणवत्ता
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने बताया कि प्लांट से पानी का सैंपल लिया जा रहा है और उसे प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा. लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्लांट से लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं.वहीं, मामले को लेकर आरओ वॉटर प्लांट के संचालक से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.
अस्पताल परिसर में पानी की बिक्री कैसे?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सदर अस्पताल परिसर में लंबे समय से संचालित इस आरओ वॉटर प्लांट की व्यवस्था की नियमित निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही थी. यदि प्लांट के पास आवश्यक लाइसेंस नहीं था और पानी की गुणवत्ता जांचने की उचित व्यवस्था भी नहीं थी, तो इतने समय तक मरीजों और आम लोगों को यहां से पानी बेचने की अनुमति कैसे मिलती रही?
अब खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और पानी की लैब रिपोर्ट पर लोगों की नजर है. रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि जिस पानी को लोग शुद्ध समझकर खरीदकर पी रहे थे, वह वास्तव में पीने योग्य मानकों पर कितना खरा उतरता है.
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