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शर्मनाक : झारखंड में हर दूसरे दिन दहेज के नाम पर मारी जा रही हैं महिलाएं

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Shruti Prakash Singh Ranchi :  सामाजिक कुरीतियों में दहेज प्रथा एक ऐसा अभिशाप है, जो कुछ लालची लोगों के चलते समाज, राज्य और देश को शर्मशार करता रहा है. कानूनन रोक के बावजूद वर्षों से यह प्रथा चलती आ रही है. दहेज के कारण महिला उत्पीड़न जारी है. नौबत हत्या- आत्महत्या तक आ जाती है. सरकार के साथ ही सामाजिक संगठनों के भरपूर प्रयास के बावजूद इसमें कमी नहीं आ पा रही है. महिला उत्पीड़न के मामले में झारखंड की बात करें तो राज्य में हर दूसरे दिन दहेज के नाम पर एक महिला की हत्या हो रही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 90 दिनों की बात करें तो झारखंड में दहेज के नाम पर 48 महिलाओं की हत्या कर दी गई.

90 दिन में इन जिलों में हुई 48 महिलाओं की हत्या

पिछले 90 दिनों के दौरान राज्य के अलग-अलग जिलों में दहेज के नाम पर 48 महिलाओं की हत्या कर दी गई. दुमका में 02, जामताड़ा में 02, साहिबगंज में 01, कोडरमा में 02, सरायकेला में 01, गढ़वा में 04, हजारीबाग में 06, देवघर में 02, पलामू में 02, कोडरमा में 01, गिरिडीह में 05, धनबाद में 04, बोकारो में 04, चतरा में 01, जमशेदपुर में 03, रामगढ़ में 02, रांची में 02 और गोड्डा में 01 महिला की हत्या दहेज के नाम पर कर दी गई है.

रोक के लिए लागू है दहेज निषेध अधिनियम, 1961

भारत में दहेज प्रथा को रोकने के लिए 1 मई 1961 को दहेज निषेध अधिनियम लागू किया गया था. इसके तहत देश में दहेज देना और लेना सख्त वर्जित है. यह देश में दहेज पर रोक से संबंधित पहला राष्ट्रीय कानून है. सख्ती से लागू करने के लिए दहेज निषेध अधिनियम में वर्ष 1961 में दो बार संशोधन भी किया गया था. इसे भी पढ़ें – तूफान">https://lagatar.in/hurricane-asani-will-hit-andhra-pradesh-and-odisha-coast-in-two-three-days-rain-alert-in-jharkhand-bengal/">तूफान

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दहेज हत्या पर हो सकती है उम्रकैद की सजा

धारा 304 (बी), भारतीय दंड संहिता, 1980 के मुताबिक दहेज को लेकर किसी महिला की मौत शादी के सात साल के भीतर शारीरिक चोट लगने, जलने या अप्राकृतिक परिस्थितियों में होती है और यह साबित हो जाता है कि उसे पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है, तो अपराधी को न्यूनतम सात वर्ष की कैद और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है.

क्या कहता है कानून

  • दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 2 में कहा गया है कि कोई भी संपत्ति जो मूल्यवान है और विवाह के दौरान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक से दूसरे को हस्तांतरित की गई हो, दहेज के रूप में मानी जाएगी.
  • दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 में दहेज देने और लेने की सजा का वर्णन है, जो कम से कम पांच साल की अवधि और 15,000 रुपये का जुर्माना या दहेज का मूल्य, जो भी अधिक हो, शामिल है.
  • इसी तरह विवाह में किसी भी पक्ष से दहेज की मांग करना अधिनियम की धारा 4 के तहत न्यूनतम छह महीने से लेकर अधिकतम पांच साल तक की सजा और 15000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
  • दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 8, धारा 3 और धारा 4 के तहत इस अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय बनाती है.
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