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हनुमान जी को अमरता का वरदान: प्रधानाचार्य
प्रधानाचार्य ने बताया कि हनुमान जी की जयंती नहीं बल्कि उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है, क्योंकि श्री हनुमान अजर-अमर हैं. उनको प्रभु श्रीराम ने अमरता का वरदान दिया था. इस कारण वे गंधमादन पर्वत पर रहने लगे. तपस्वियों के अनुसार वे आज भी वहां सशरीर विद्यमान हैं. इस वजह से श्री हनुमान जी की जयंती नहीं बल्कि उनका जन्मोत्सव मनाना चाहिए. चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को श्री हनुमान जन्मोत्सव बड़ी श्रद्धा व भक्ति के साथ संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है. इसे भी पढ़ें: किरीबुरु:">https://lagatar.in/kiriburu-shiva-discussion-on-hanuman-birth-anniversary-bhandara-after-bhajan-kirtan/">किरीबुरु:हनुमान जन्मोत्सव पर हुई शिव चर्चा, भजन-कीर्तन के बाद लगा भंडारा [wpse_comments_template]

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