Pramod Upadhaya Hazaribagh: ग्रामीण आबादी को स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए चिकित्सा केंद्र बनाये गये हैं. वहां स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति भी की गयी है. लेकिन इसका फायदा लोगों को नहीं मिल रहा है. जिले के इचाक स्थित नावाडीह पंचायत के ग्रामीणों को ऐसी ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. नावाडीह पंचायत की करीब 10 हजार की आबादी का इलाज वर्षों से दो स्वास्थ्यकर्मियों के भरोसे चल रहा है. अगर हालत गंभीर हुई, तो लोगों को इलाज के लिए 16 किमी दूर जिला मुख्यालय या फिर इचाक 12 किमी जाना पड़ता है. ऐसी बात नहीं है कि नावाडीह में स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. लेकिन यहां तिलरा के निचतपुर टोला में बना हेल्थ सेंटर सिर्फ दिखावे के लिए है. एक दशक पहले बने इस हेल्थ सेंटर में एक भी डॉक्टर नहीं है. यहां एक एएनएम और एक कलस्टर हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) प्रतिनियुक्ति में हैं. लेकिन हेल्थ सेंटर में अक्सर ताला लटका रहता है. ग्रामीण विकास कुमार कहते हैं कि जब भी इमरजेंसी इलाज की जरूरत पड़ती है, लोगों को हजारीबाग या फिर इचाक हेल्थ सेंटर की दौड़ लगानी पड़ती है. मामूली सर्दी-खांसी व बुखार की दवाइयां तो सीएचओ और एएनएम लिख देती हैं. हालांकि दोनों जल्दी मिलते ही नहीं हैं. स्वास्थ्य केंद्र में तैनात सीएचओ और एएनएम को कोई न कोई काम रहता है. इस वजह से वह बाहर रहने की बात करते हैं.
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60 लाख की लागत से बने थे दो उप स्वास्थ्य केंद्र
बता दें कि एक दशक पूर्व करीब 60 लाख की लागत से ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए यहां उप स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था. उसे अपग्रेड कर स्वास्थ्य केंद्र बना दिया गया. तीन साल पहले करीब चार लाख की राशि से जर्जर हो गए भवन की मरम्मत भी कराई गई. हेल्थ सेंटर को तो चकाचक कर दिया गया, लेकिन जो होना चाहिए था वह नहीं हुआ. न तो एएनम और न ही सीएचओ मिलते हैं. ऐसे में मरीजों के सामने इलाज की समस्या हो जाती है. ग्रामीण जगदेव साव कहते हैं कि तबीयत खराब है. तीन दिनों से वह स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन किसी से मुलाकात ही नहीं हो पायी. मजबूरन झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराकर दवाइयां लेनी पड़ी. यही कारण है कि आज इन ग्रामीण इलाकों में बंगाल से दर्जनों झोलाछाप डॉक्टर गली-गली में घूम कर इलाज कर रहे हैं, लेकिन इससे परेशानी मरीजों को होती है. कई मरीज उन झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराकर अपनी जान गंवा रहे हैं.नहीं मिलता है एंबुलेंस
बीमार ग्रामीण जगदेव साव ने बताया कि उन्होंने कई बार फोन से इचाक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉक्टर ओम प्रकाश से इस बारे में शिकायत की, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला. उन्होंने कहा कि एएनएम से पूछकर जानकारी लेंगे. एएनएम से ग्रामीण ने जब फोन पर पूछा, तो कहा कि वह फील्ड में हैं. ग्रामीण रूपेश यादव, सुदामा यादव और अंकित साव का कहना है कि जब रात में कोई भी बीमार पड़ता है, तो काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. गांव में न एंबुलेंस है, न ही ममता वाहन. गर्भवती महिलाओं को भी काफी दिक्कत होती है. काफी मान-मनव्वल करने के बाद सरकारी एंबुलेंस आती भी है, तो घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ती है. थक-हारकर ग्रामीण ऑटो से बीमार लोगों को शहर या प्रखंड मुख्यालय ले जाते हैं. इसमें काफी पैसे खर्च होते हैं.इस बारे में किसी ने शिकायत नहीं की है - डॉ ओमप्रकाश
इचाक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ ओमप्रकाश कहते हैं के इस बारे में किसी ग्रामीण ने कोई शिकायत नहीं की है. अगर तिलरा स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम गायब रहती है, तो शिकायत मिलने पर उनको शोकॉज किया जाएगा. वह स्वास्थ्य केंद्र स्थानीय लोगों के इलाज के लिए बनाया गया है. पूरे इचाक प्रखंड में महज दो डॉक्टर ही तैनात हैं. इसे भी पढ़ें- शिक्षक">https://lagatar.in/ssc-recruitment-scam-cm-mamta-banerjee-took-action-on-partha-chatterjee-removed-from-the-post-of-minister/">शिक्षकभर्ती घोटाला : सीएम ममता बनर्जी ने पार्थ चटर्जी पर एक्शन लिया, मंत्री पद से हटाया [wpse_comments_template]
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