Hazaribagh: मैं चाहे ये करूं, मैं चाहे वो करूं, मेरी मर्जी…..कुछ ऐसे ही मनमौजी हैं शिक्षा विभाग के कुछ
बाबू. उन्हें
ऑफिसियल अनुशासन या नियमों से कोई लेना-देना नहीं
है. ऐसे
बाबू पदाधिकारियों के भी काबू में नहीं
हैं. थक हारकर पदाधिकारी कार्रवाई करने को बाध्य
हैं. ऐसी ही कार्रवाई डीएसई चतरा ने की
है. हालांकि इस कार्रवाई पर भी कई सवाल उठ खड़े हुए
हैं. दरअसल तीनों लिपिक बिना सूचना के गायब पाए गए
थे. तीनों चतरा डीएसई कार्यालय में प्रतिनियोजित
थे. अनुपस्थित पाए जाने पर डीएसई ने चतरा से उनका प्रतिनियोजन रद्द करते हुए उन्हें विरमित कर मूल जगहों पर भेज
दिया. इस संबंध में आरडीडीई को पत्र के माध्यम से जानकारी भी दे
दी. सवाल उठाया जा रहा है कि तीनों लिपिकों रविशंकर शुक्ला,
जुएल बारला और प्रमोद पासवान को डीएसई कैसे विरमित कर सकते
हैं. तीनों लिपिकों का प्रतिनियोजन आरडीडीई ने प्रमंडलीय शिक्षा स्थापना समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार किया
था. उनका आरडीडीई स्तर से ही प्रतिनियोजन रद्द किया जा सकता
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आरडीडीई ने किया चतरा डीएसई को शोकॉज
यह भी सवाल उठ रहा है कि अगर लिपिक लगातार गायब रह रहे हैं, तो उनकी अनुपस्थिति विवरणी कैसे दी जा रही
थी. यह कार्य भी डीएसई चतरा के माध्यम से ही हो रहा
था. बता दें कि लिपिक रविशंकर शुक्ला अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय हजारीबाग,
जुएल बारला डीएसई कार्यालय हजारीबाग और प्रमोद पासवान डीएसई ऑफिस गिरिडीह से चतरा डीएसई कार्यालय में प्रतिनियोजित किए गए
थे. इधर आरडीडीई ने चतरा डीएसई को शोकॉज किया है कि किन नियमों के तहत लिपिकों का प्रतिनियोजन रद्द किया गया
है. इस संबंध में आरडीडीई पुष्पा कुजूर से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें याद नहीं है, मामले को देखने के बाद ही कुछ बता सकती
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