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हजारीबाग : ढाई दशक से मुआवजे के लिए दर-दर भटक रहे आश्रित

कभी अधिकारी के पास दे रहे आवेदन, तो कभी जनता दरबार में लगा रहे गुहार साल 1998 में बड़कागांव में माआवादियों ने किया था नरसंहार, मारे गए थे छह ग्रामीण Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग के बड़कागांव स्थित झिकझोर पंचायत के गोसाईं बलिया में रहनेवाले छह लोग पिछले ढाई दशक से मुआवजे के लिए भटक रहे हैं. कभी अधिकारियों को आवेदन देते हैं, तो कभी डीसी के जनता दरबार में न्याय की गुहार लगा रहे हैं. वर्ष 1998 में गोसाईंबलिया में माओवादियों ने नरसंहार किया था. उसमें कार्तिक मुंडा, सोमरा मुंडा, आसीन मुंडा, चरका मुंडा, महादेव मुंडा और शनिचरा मुंडा की हत्या कर दी गई थी. माओवादियों ने इन लोगों को पुलिस का मुखबिर बताकर हत्या कर दी थी. उस वक्त मृतकों के परिजनों को सरकार की ओर से मुआवजा मिलने का आश्वासन दिया गया था. इसे भी पढ़ें :बहरागोड़ा">https://lagatar.in/bahragora-it-is-unfortunate-not-to-nominate-odia-and-bangla-educationist-in-jack-board-dr-shadangi/">बहरागोड़ा

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न मुआवजा मिला, न नौकरी : कैलाश मुंडा

माओवादियों के नरसंहार का शिकार कार्तिक मुंडा का पुत्र कैलाश मुंडा ने कहा कि पिता की हत्या के करीब 24 वर्षों के बाद भी न मुआवजा मिला और न नौकरी. परिवार की गाड़ी मुश्किल से खींच पा रही है. उस वक्त सरकार और प्रशासन से मुआवजा और किसी एक आश्रित को नौकरी मिलने का आश्वासन मिला था. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/hhhh-4-1.jpg"

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अन्य आश्रितों का भी यही हाल

गोसाईंबलिया में माओवादी नरसंहार का शिकार हुआ आसीन मुंडा की बेटी मंजू कुमारी, मृतक सोमरा मुंडा का बेटा दिलीप मुंडा, भिखन मुंडा व छोटू मुंडा, मृतक चरका मुंडा की बेटी सुगंती कुमारी, मृतक महादेव मुंडा का बेटा रिंकू मुंडा और शनिचरा मुंडा का बेटा प्रदीप मुंडा का भी वही हाल है. उन्हें न तो मुआवजा मिला और न ही नौकरी. इसे भी पढ़ें :पीएम">https://lagatar.in/sibals-taunt-on-pm-modis-statement-ending-nepotism-what-do-you-have-to-say-on-the-appointment-of-vice-chancellors-in-the-university/">पीएम

मोदी के भाई भतीजावाद समाप्त करने वाले बयान पर सिब्बल का तंज, विवि में कुलपतियों की नियुक्ति पर आपका क्या कहना है…
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वर्ष 2017 और 2020 से मुआवजा और नौकरी की आस लिए दौड़ लगा रही दो महिलाएं

वर्ष 2017 और 2020 से मुआवजा और नौकरी की आस लिए दो महिलाएं सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट रही हैं. बीते मंगलवार को भी सरिता कुमारी और गीता देवी डीसी की जनता दरबार पहुंची थीं. गीता देवी के पति प्रदीप पासी की हत्या 31 जुलाई 2017 को कर दी गई थी. सरिता देवी ने बताया कि उनकी मां चंपा देवी की हत्या वर्ष 2020 में कर दी गई थी. प्रदीप की हत्या उग्रवादी संगठन जेजेएमपी के सदस्यों ने पुलिस मुखबिर का आरोप लगाकर कर दी थी. वहीं चंपा देवी की हत्या गवाह बनने के कारण कर दी गई थी. [wpse_comments_template]

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