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हजारीबाग : सरकारी घोषणा के 21 साल बाद भी नहीं मिली बेटों को नौकरी

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दर-दर भटक रहे उग्रवादी के हाथों मारे गए रामकृपाल के परिजन मसोमात नीरू देवी ने दी भूख हड़ताल करने की चेतावनी Suraj Kumar Chouparan : हजारीबाग स्थित चौपारण प्रखंड की पड़रिया पंचायत के बनउ निवासी मसोमात नीरू देवी अपने दोनों बेटों की नौकरी के लिए दर-दर भटक रही हैं. दरअसल उनके पति रामकृपाल सिंह की हत्या उग्रवादियों ने कर दी थी. तब की गई सरकारी घोषणा के मुताबिक उनके बेटों को नौकरी मिल जानी चाहिए थी. लेकिन घोषणा के 21 वर्षों के बाद भी नीरू देवी के बेटों को नौकरी नहीं मिली है. ऐसे में उनकी माली हालत ठीक नहीं है. वह अपने दोनों बेटों की नौकरी के लिए दर-दर भटकने को विवश हैं. उन्होंने कई बार सांसद जयंत सिन्हा एवं बरही विधायक सह निवेदन समिति सभापति उमाशंकर अकेला को ज्ञापन सौंप कर लोकसभा और विधानसभा में बात रखने की मांग कर चुकी हैं. इसे भी पढ़ें-फर्जी">https://lagatar.in/two-highways-carrying-minerals-on-fake-challan-seized-fir-lodged-against-owner-and-driver/">फर्जी

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छह लोगों की बेरहमी से कर दी गई थी हत्या

नीरू देवी ने बताया कि तब झारखंड राज्य बनने के बाद इस प्रदेश से सटे बिहार के सीमावर्ती चौपारण प्रखंड में उग्रवादियों का तांडव चरम पर था. उग्रवादी अपने वर्चस्व के लिए जंगली क्षेत्र के ग्रामीणों पर कहर बरपाते थे. 20 सितंबर 2002 को उग्रवादियों ने यहां छह लोगों को बेरहमी से मार दिया था. इनमें ग्राम बनउ से रामकृपाल सिंह, डब्लू कुमार सिंह उर्फ सत्यदेव सिंह, मटकी भुइयां, नांदो भुइयां, इंगुनिया से सुशील सिंह और खड्गधारी साव शामिल थे. इस घटना से मर्माहत परिजनों को प्रखंड व जिला प्रशासन, विधायक, सांसद सहित मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति का भी सांत्वना मिली थी. साथ ही कई प्रकार का लाभ देने की घोषणा की गई थी. यहां तक कि तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और हजारीबाग सांसद सह केंद्रीय वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने पीड़िता के घर बनउ आकर घोषणा की थी कि मृतक के बच्चों को पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति और 25 साल उम्र हो जाने पर नौकरी दी जाएगी. इसे भी पढ़ें-रांची">https://lagatar.in/ranchi-hearing-in-speaker-court-in-kamlesh-singh-defection-case-remained-incomplete/">रांची

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2017 तक मिली छात्रवृत्ति, अब नौकरी की आस

मसोमात नीरू देवी ने बताया कि इस घोषणा के बाद उनके दो बेटे संदीप कुमार सिंह और रोहित कुमार सिंह को पढ़ाई के लिए राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सद्भाव प्रतिष्ठान नई दिल्ली की ओर से वर्ष 2017 तक छात्रवृत्ति दी गई. लेकिन 25 वर्ष उम्र पार हो जाने के बाद भी घोषणा के अनुरूप उनके किसी बेटे को नौकरी नहीं मिली है. उन्होंने वर्तमान सांसद और विधायक से लोकसभा एवं विधान सभा में प्रश्न उठाकर नौकरी की तिथि तय करवाने की मांग की थी. साथ ही सांसद जयंत सिन्हा, विधायक उमाशंकर अकेला, नियोजन मंत्री सत्यानंद भोगता, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड सरकार के प्रधान सचिव, कारा एवं आपदा प्रबंधन प्रधान सचिव, डीसी हजारीबाग के कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते थक चुकी हैं. नीरू देवी ने कहा कि अगर उनके बेटों को नौकरी नहीं मिली, तो विवश होकर आमरण अनशन पर बैठ कर न्याय की गुहार लगाएंगी. [wpse_comments_template]

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