- हजारीबाग का केरोसिन अग्निकांड मामला
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग के वर्ष 2021 के केरोसिन अग्निकांड मामले में आदेश पारित किया और राज्य सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि झारखंड में बर्न मरीजों के लिए पर्याप्त और आधुनिक सुविधाओं का भारी अभाव है, जो सीधे तौर पर लोगों के जीवन के अधिकार (Article 21) का उल्लंघन है. कोर्ट ने माना कि झारखंड के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक बर्न यूनिट लगभग नहीं के बराबर हैं.
राज्य के कई मेडिकल कॉलेजों में कहीं डॉक्टर नहीं, तो कहीं स्टाफ ज्यादा लेकिन डॉक्टर नहीं है. कहीं बेड हैं लेकिन इलाज की सुविधा नहीं है. कोर्ट ने इसे “राज्यव्यापी सिस्टम की विफलता” बताया है. खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है तो मुआवजा देना उसका संवैधानिक दायित्व है.
क्या था मामला
दरअसल, यह मामला वर्ष 2021 में हजारीबाग में हुए एक दर्दनाक अग्निकांड से जुड़ा है. आरोप था कि पीडीएस केरोसिन (मिट्टी तेल) अत्यधिक ज्वलनशील और मिलावटी था. लैब रिपोर्ट में फ्लैश प्वाइंट सिर्फ 13.5°C पाया गया (मानक 35°C से बहुत कम). इस घटना में 4 लोगों की मौत (जिसमें एक 2 साल का बच्चा भी शामिल) है और करीब 15 लोग गंभीर रूप से झुलसे थे. कई लोग स्थायी रूप से विकलांग/विकृत हुए थे.
क्या है आरोप
याचिका में आरोप था कि सदर अस्पताल, हजारीबाग में बर्न यूनिट नहीं थी. मरीजों को सामान्य वार्ड में रखा गया, जरूरी दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ी. गंभीर मरीजों को समय पर रिम्स नहीं भेजा गया.
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