Search

 
 
 

हजारीबाग वन भूमि घोटाला : 6 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज

Ranchi News : एसीबी के अनुसार, यह सरकारी जमीन, जो वन भूमि है, के हस्तांतरण का मामला है और इसमें बड़े स्तर पर षड्यंत्र की आशंका है. आरोपियों की भूमिका जमीन के हस्तांतरण में बताई गई है. जांच एजेंसी ने आशंका जताई कि आरोपियों को अग्रिम जमानत मिलने पर वे अभी जुटाए जाने वाले साक्ष्यों और जांच सामग्री से छेड़छाड़ कर सकते हैं.
 
हाई कोर्ट
  • हजारीबाग में सरकारी जमीन हस्तांतरण में बड़े षड्यंत्र का आरोप

Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग के सरकारी जमीन, जिसे वन भूमि बताया गया है, के कथित हस्तांतरण और बड़े षड्यंत्र से जुड़े मामले में छह आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद वे संपत्ति पर अपने अधिकार के दावे के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज एसीबी के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके हैं.

 

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनूभा रावत चौधरी की अदालत ने जिन 6 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की उनमें राज कुमार प्रजापति, कुलेश्वर प्रजापति, युगेश्वर प्रजापति उर्फ उगेश्वर प्रजापति, रामदेव प्रजापति उर्फ रामदयाल प्रजापति, नेमी चंद प्रजापति और तिलक प्रजापति उर्फ तिलक महतो शामिल हैं. 

 

दरअसल, यह मामला हजारीबाग एसीबी थाना कांड संख्या 11/2025 से संबंधित है. ये सभी हजारीबाग के नया खाप, मुकुंदगंज क्षेत्र के निवासी हैं.

 

1929 के सादा हुकुमनामा का दिया हवाला

आरोपियों की ओर से अदालत में कहा गया था कि उन्होंने संबंधित संपत्ति 1929 में सादा हुकुमनामा के माध्यम से हासिल की थी और तभी से वे जमीन पर कब्जे में हैं. बचाव पक्ष ने वर्ष 2004 की एक किराया रसीद और संपत्ति के उत्तराधिकार को दर्शाने वाली पारिवारिक वंशावली भी अदालत के समक्ष रखी.

 

आरोपियों की ओर से यह भी बताया गया था कि हाईकोर्ट के अंतरिम राहत के बाद वे लगातार एसीबी के समक्ष उपस्थित हो रहे हैं और जांच में सहयोग कर रहे हैं. उनके अनुसार, इतने वर्षों से जमीन पर उनके कब्जे और दावे पर राज्य की ओर से कभी आपत्ति नहीं की गई.

 

एसीबी ने बताया, सरकारी वन भूमि का मामला

वहीं, एसीबी की ओर से सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामले की जांच अभी जारी है. आरोपियों को अपने स्वामित्व के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था, लेकिन वे पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके. एसीबी ने यह भी दावा किया कि हुकुमनामा में दर्ज नाम भी आरोपियों के दावे से मेल नहीं खाते हैं.

 

एसीबी के अनुसार, यह सरकारी जमीन, जो वन भूमि है, के हस्तांतरण का मामला है और इसमें बड़े स्तर पर षड्यंत्र की आशंका है. आरोपियों की भूमिका जमीन के हस्तांतरण में बताई गई है. जांच एजेंसी ने आशंका जताई कि आरोपियों को अग्रिम जमानत मिलने पर वे अभी जुटाए जाने वाले साक्ष्यों और जांच सामग्री से छेड़छाड़ कर सकते हैं.

 

हाईकोर्ट ने कहा कि अवसर दिए जाने के बावजूद आरोपी एसीबी के समक्ष संपत्ति पर अपने दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सके. कोर्ट ने यह भी पाया कि जिस हुकुमनामा पर भरोसा किया जा रहा है, वह अपंजीकृत दस्तावेज है, जबकि अदालत के समक्ष प्रस्तुत सबसे पुरानी किराया रसीद वर्ष 2004 की है.

 

कोर्ट ने कहा कि आरोपी अभी भी कुछ दस्तावेज जुटाने का प्रयास कर रहे हैं. साथ ही सरकारी जमीन के कथित बड़े पैमाने पर हस्तांतरण से जुड़े षड्यंत्र के आरोप और जांच में अभी साक्ष्य एकत्र किए जाने की स्थिति को देखते हुए साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने पूर्व में दिया गया अंतरिम राहत भी समाप्त कर दिया.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही