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फैशन की दुनिया में दिखने लगीं हजारीबाग की 5000 वर्ष प्राचीन कलाकृतियां

 
सोहराय कला उकेरे परिधान पहन रैंप पर महिलाओं ने किया कैटवॉक मॉडलों के पोशाक पर खूब फबी गुफा और दीवारों पर की गई नक्काशी Gaurav Prakash Hazaribagh : हजारीबाग की गुफाओं और दीवारों से निकलकर पांच हजार साल पुरानी कलाकृतियां अब फैशन की दुनिया में भी अपना परचम लहराने लगी हैं. यह विलुप्तप्राय कलाकृतियां फिर से जीवंत हो उठी हैं. अब रैंप पर कैटवॉक करनेवाली मॉडलों के परिधानों पर विश्वप्रसिद्ध हजारीबाग की सोहराय कला दिखाई पड़ रही हैं. हजारीबाग के डॉल्फिनो रेस्टोरेंट में रविवार को ईस्ट इंडिया सुपर मॉडल सेशन-5 का आयोजन किया गया था. यह आयोजन पूरे राज्य भर के हर जिले में होना है. इसकी शुरुआत हजारीबाग से की गई. यहां 35 महिला मॉडलों ने रैंप पर अपना जलवा बिखेरा. उनमें से 25 मॉडल सोहराय कला के बने हुए परिधान पहनी हुई थीं. हजारीबाग जैसे छोटे से शहर से निकली यह कलाकृतियां अब फैशन की दुनिया में विश्व पटल पर अपना छाप छोड़ने को बेकरार है. ईस्ट इंडिया सुपर मॉडल सेशन-5 हजारीबाग के बाद धनबाद, रांची, जमशेदपुर और बोकारो में भी आयोजित होगा और नवंबर में इसका फाइनल रांची में आयोजित किया जाएगा. इसे भी पढ़ें :करम">https://lagatar.in/cultural-programs-at-many-places-in-ranchi-on-karam-eve/">करम

पूर्व संध्या पर रांची में कई स्थानों पर सांस्कृृतिक कार्यक्रम
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मां-बेटे की कल्पना भरने लगी उड़ान

सोहराय कल को नई ऊंचाई देने के लिए इन दिनों पद्मश्री बुलू इमाम की पुत्रवधू अलका इमाम और उनके पुत्र एडम विशेष रूप से कम कर रहे हैं. अलका इमाम ने बताया कि ईस्ट इंडिया सुपर मॉडल सेशन-5 के लिए पंकज कुमार ने उनसे संपर्क साधा. उन्होंने कहा कि क्यों न सोहराय कला को भी रैंप पर उतारा जाए. जब उन्होंने बात की, तो सोहराय पर काम करनेवाले लगभग 20 छात्र-छात्राएं इसके लिए तैयार हो गए. उनका यह भी कहना है कि पिछले कुछ दिनों से सोहराय कला को नई पहचान देने के लिए उसे विभिन्न परिधानों पर उकेरा जा रहा है. महिलाएं साड़ी पहनकर उसे फैशन की दुनिया में लाने की कोशिश कर रही हैं. वहीं लड़के भी अपनी कमीज पर इसकी पेंटिंग बना रहे हैं. शर्ट भी फैशन की दुनिया में अपनी पहुंच बना रहा है. एक छोटे से शहर हजारीबाग में मंच दिया गया है. लेकिन इस मंच ने सोहराय कला पर जो कम कर रहे हैं, उनका मनोबल ऊंचा किया है.

…तो इस परिधान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिलेगी पहचान

अलका इमाम के बेटे एडम ने बताया कि पिछले कई दिनों से सोहराय को फैशन की दुनिया में लाने की कोशिश की जा रही है. अगर बड़े-बड़े फैशन शो में सोहराय कला उकेरा हुआ परिधान महिलाएं पहनेंगी, तो इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलेगी. उनका कहना है कि यह सारे डिजाइन उन्होंने छात्रों से बनवाया है. नि:संदेह एक अच्छा मंच मिल रहा है. आने वाले दिनों में सोहराय कला उकेरे परिधान ऊंची उड़ान भी लगाने जा रहा है. दीवारों और गुफाओं की कलाकृतियां अब परिधान में आ रही हैं यह सबसे अच्छी बात है और लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें :गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-dozens-of-youth-joined-bharatiya-janata-party/">गिरिडीह

: दर्जनों युवाओं ने थामा भारतीय जनता पार्टी का दामन
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एयरपोर्ट और प्रमुख दफ्तरों की दीवारों से परिधान तक पहुंची सोहराय कला

रांची से पहुंचे आयोजन डॉक्टर आरिफ नासिर ने कहा कि हजारीबाग जैसे छोटे शहर में भी अब युवक-युवतियां फैशन में अपना करियर बनाना चाह रहे हैं. यह अच्छे संकेत हैं. फैशन के क्षेत्र में करियर का दायरा काफी बढ़ गया है. उन्होंने यह भी कहा कि सोहराय कला जिस एयरपोर्ट और प्रमुख दफ्तरों की दीवारों पर देखी जाती थी, अब वह कलाकृतियां महिलाओं के परिधान में नजर आ रही हैं. ऐसे में यह फैशन शो एक नया आयाम भी लिखने जा रहा है. [wpse_comments_template]
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