Hazaribagh : हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड के पीडीएस डीलर सह भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता नेमीचंद दांगी (55 वर्ष) बीमार थे. शनिवार हजारीबाग अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. उनकी अचानक हुई मौत से चौपारण की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर चर्चा और सवालों में घिर गई है. इस घटना ने गंभीर मरीजों के इलाज, रेफरल प्रक्रिया और इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर नई बहस छेड़ दी है.
जानकारी के अनुसार, शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद नेमीचंद दांगी को लेकर परिजन चौपारण सीएचसी पहुंचे. उनका ब्लड प्रेशर व शुगर काफी बढ़ा हुआ था. प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें हजारीबाग रेफर कर दिया.
परिजन उन्हें निजी वाहन से हजारीबाग ले जा रहे थे. रास्ते में उनकी तबीयत और बिगड़ गई और अचेत हो गए. परिजन तत्काल उन्हें वापस चौपारण अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
घटना की सूचना पाकर विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव अस्पताल पहुंचे और चिकित्सा प्रभारी डॉ. डीएन. ठाकुर से मामले की जानकारी ली. उन्होंने नेमीचंद दांगी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि गंभीर मरीजों को रेफर करते समय विशेष सतर्कता बरतनी चहिए थी. ऐसे मामलों में एम्बुलेंस, ऑक्सीजन सपोर्ट और आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि रास्ते में मरीज की स्थिति बिगड़ने पर तत्काल मदद मिल सके.
घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि मरीज को रेफर करने के बाद क्या सभी आवश्यक मानकों का पालन हुआ और गंभीर मरीजों के लिए उपलब्ध संसाधन कितने प्रभावी हैं.
हालांकि अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. मौत के वास्तविक कारणों और उपचार से जुड़ी परिस्थितियों पर भी अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है. हालांकि इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर दिया है.
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