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हजारीबाग : चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों की टीम में पीयूष ने निभाई अहम भूमिका

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हजारीबाग के रेवाली स्थित ननिहाल में खूब मना जश्न ममेरे भाई अभिनीत ने कहा-पीयूष भैया पर गौरवान्वित हो रहा हजारीबाग समेत पूरा झारखंड दुनिया ने अंतरिक्ष विज्ञान में भारत का दम देखा और अब जल्द ही हिन्दुस्तान सूर्य पर भी होगा : पीयूष Amarnath Pathak Hazaribagh : चंद्रयान-3 के वैज्ञानिकों की टीम में अहम भूमिका निभानेवाले पीयूष कुमार गौरव का हजारीबाग से गहरा रिश्ता रहा है. यहां उनका ननिहाल है और जब चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर धीरे-धीरे लैंड कर रहा था, तो हजारीबाग स्थित रेवाली के रॉय परिवार की धड़कनें भी बढ़ रही थीं. समाजसेवी दिवंगत दुर्गेश्वर प्रसाद रॉय के परिवार की नजरें चंद्रयान-3 की लैंडिंग की पल-पल की खबरों पर टिकी हुई थीं. गौरव के ममेरे भाई इंफोसेस में इंजीनियर अभिनीत सौरभ ने बताया कि पूरे परिवार के सदस्यों की सांसें अटकी हुई थीं. टीवी पर सभी खबरें और सीधा प्रसारण देख रहे थे. चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर लैंड होते हुए पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. सभी ने मोबाइल और एसएमएस के जरिए पीयूष को बधाई और शुभकामनाएं देने लगे. घर में पहले से ही मिठाई मंगाकर रखी गई थी. आस-पड़ोस के लोगों को भी मिठाइयां खिलाकर जश्न मनाया गया. पिछले तीन दिनों से रेवाली गांव में चंद्रयान-3 और पीयूष की ही चर्चा है. पीयूष दिवंगत दुर्गेश्वर रॉय के नाती हैं. इसे भी पढ़ें :बेरमो">https://lagatar.in/bermo-bdo-removed-the-misconception-of-angry-ration-consumers-of-gomia/">बेरमो

: गोमिया के नाराज राशन उपभोक्ताओं की गलतफहमी बीडीओ ने की दूर
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पीयूष चंद्रयान-3 मिशन में थे शामिल

अभिनीत ने बताया कि उनके फुफेरे भैया पीयूष कुमार गौरव इसरो के चंद्रयान-3 मिशन में शामिल थे. इस टीम का हिस्सा बन उन्होंने न सिर्फ हजारीबाग, बल्कि पूरे झारखंड को गौरवान्वित किया है. पिछले 12 वर्षों से वह इसरो में बतौर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं. उनकी स्कूली शिक्षा पटना के संत किरण स्कूल से हुई है. प्लस टू की पढ़ाई कोटा से की. पीयूष के पिता प्रेमनाथ शर्मा और माता संगीता शर्मा, पत्नी अंकिता कुमारी और बेटा इवान अगस्त्य सभी बंगलोर में रहते हैं. इसे भी पढ़ें :ATS">https://lagatar.in/joint-operation-ats-and-ranchi-police-two-jjmp-militants-arrested-for-taking-levy-from-land-trader/">ATS

व रांची पुलिस की संयुक्त कार्रवाई: जमीन कारोबारी से लेवी लेने आए JJMP के दो उग्रवादी गिरफ्तार
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पढ़ाई में शुरू से ही तेज रहे हैं पीयूष

आईआईटी कानपुर से उन्होंने मास्टर्स और पीएचडी की उपाधि ली. वर्ष 2007 आईआईटी जी क्वालिफाई कर आईआईएसटी तिरुवंतपुरम से की. अगस्त 2011 को इसरो ज्वाइन किया. बचपन में ही उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान से लगाव था. करियर के शुरुआती दिनों में इलेक्ट्रिक सिस्टम इंजीनियर बन डिजाइन करते थे. बाद में एस्ट्रो डायनामिक्स में दिलचस्पी जगी तो फ्लाइट डायनामिक्स ज्वाइन कर लिया. चंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद पीयूष काफी खुश थे और उन्होंने संदेश दिया कि दुनिया ने अंतरिक्ष विज्ञान में भारत का दम देखा और अब जल्द ही हिन्दुस्तान सूर्य पर भी होगा. [wpse_comments_template]

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