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हजारीबाग रामनवमी : दर्द व आंसुओं में बदल गया खुशियों व आस्था का प्रतीक यह त्योहार

भुजाली, तलवार, चाकू, भाले और उपर से शराब का नशा. डीजे का कानफाड़ू शोर. यह सब मिलकर जुलूस को श्रद्धा, शक्ति और आस्था के बदले कुछ और ही बना दे रहा है. पारंपरिक हथियारों का प्रदर्शन के बदले नये चाईनीज हथियारों ने जगह ले ली है. उपर से रामनवमी के बहाने आपसी दुश्मनी को साधने के मंसूबे ने इस पर्व को अब अलग ही लेवल पर पहुंचा दिया है.
 
हजारीबाग रामनवमी की एक प्रतीकात्मक तस्वीर.
  • आपस में तलवारबाजी में चार युवकों की मौत.
  • 500 से अधिक युवक घायल, कई की हालत गंभीर.

त्वरित टिप्पणी

हजारीबाग का ऐतिहासिक रामनवमी और विजयादशमी का जुलूस इस साल चार युवकों की मौत का गवाह बन गया. मरने वालों के नाम प्रिंस कुमार, योगेश जयसवाल, बबन राम और अभिषेक वर्मा है. चारों की असमय मृत्यु हो गई और खुशियों व आस्था का प्रतीक यह त्योहार दर्द व आंसुओं में बदल गया.

 

शोभा यात्रा (जुलूस) अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन हजारीबाग में चार लोगों की मौत की दुखद घटना ने पूरे शहर को शोक में डुबो दिया. हजारीबाग शहर ने चार लोगों को हमेशा के लिए खो दिया. उनके परिवार को हमेशा के लिए शोक में डुबो दिया. अब भी 500 लोग घायल हैं. जिनमें कई की स्थिति गंभीर है.

 

 

आज (रविवार) की सुबह ही हजारीबाग के कुछ लोगों से बात हो रही थी, वह बता रहे थे- भुजाली, तलवार, चाकू, भाले और उपर से शराब का नशा. डीजे का कानफाड़ू शोर. यह सब मिलकर जुलूस को श्रद्धा, शक्ति और आस्था के बदले कुछ और ही बना दे रहा है. पारंपरिक हथियारों का प्रदर्शन के बदले नये चाईनीज हथियारों ने जगह ले ली है. उपर से रामनवमी के बहाने आपसी दुश्मनी को साधने के मंसूबे ने इस पर्व को अब अलग ही लेवल पर पहुंचा दिया है.

 

सुरक्षा के लिए पुलिस है. हजारों जवान हैं. सैंकड़ों अधिकारी हैं. पर, रामनवमी जैसे त्योहार में पब्लिक जिस तरह से व्यवहार करती है, जिस तरह एक खास दल हर छोटी बात को बतंगड़ बनाने के लिए उतावला रहता है, उसमें प्रशासन का हथियार प्रदर्शन पर शक्ति बरतना संभव ही नहीं है. 

 

हथियार प्रदर्शन और सबसे आगे रहने की जिद अखाड़ों के बीच खूनी संघर्ष का माहौल पैदा कर देता है. जुलूस के दौरान ही युवक आपस में मारपीट करने, डीजे व शोभा यात्रा में शामिल वाहनों में तोड़ फोड़ करने लगते हैं. प्रशासन सख्ती करे, तो सारी समितियां प्रशासन के खिलाफ खड़ी हो जाती है. 

 

रामनवमी महासमिति का चुनाव होता है, पर उसके पदाधिकारी कौन लोग बनते हैं, वह किसी से छिपा नहीं है. महासमिति का पदाधिकारियों की बात कोई भी समिति कभी सुनता ही नहीं है. समाज उन्हें किस रूप में देखता है, यह भी हर कोई जानता है.

 

जरूरी है समय रहते ऐसे धार्मिक आयोजनों को लेकर समितियां खुद अपने गिरेबां में देखे. खुद के लिए आचार संहिता  तैयार करे. और प्रशासन बिना किसी दवाब के हथियार के प्रदर्शन पर रोक लगाये. शराब पीकर जुलूस में शामिल होने पर रोक लगाये. अगर ऐसा नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में हमें और भी बुरा देखना पड़ सकता है. 

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