गांव में होती प्लस टू स्कूल की सुविधा, तो नहीं जाना पड़ता शहर Pramod Upadhyay Hazaribagh : कटकमसांडी के पबरा में विद्यार्थियों ने प्लस टू स्कूल खोलने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्रशासन और सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए आवाज बुलंद की है. विद्यार्थियों का कहना है कि यहां वर्षों से हाई स्कूल है, लेकिन प्लस टू स्कूल नहीं है. अगर यहां हाई स्कूल को प्लस में अपग्रेड कर दिया जाता, तो उनकी समस्याएं खत्म हो जाएगी. छात्र-छात्राओं का कहना है कि प्लस टू स्कूल नहीं रहने से उन्हें 10 किमी दूर शहर जाना पड़ता है. एक तो आने-जाने में जितना वाहन किराया लगता है, उतना खर्च तो पढ़ाई में भी नहीं होता है. हर दिन आने-जाने में कम-से-कम 50 रुपए लग जाते हैं. ऊपर से दिनभर की थकान से रात में पढ़ाई बाधित होती है. वक्त भी जाया होता है. करीब चार घंटे का समय बर्बाद होता है. इस वजह से रिजल्ट भी प्रभावित होता है. यहां दसवीं कक्षा में 102 छात्र-छात्राएं पढ़ती है, जो अगले साल प्लस टू में जाएंगे. इसमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है. विद्यार्थियों का यह भी कहना है कि सरकार के प्रावधान के तहत प्रत्येक 10 किलोमीटर की दूरी पर हाई स्कूल और प्लस टू की पढ़ाई होगी. यह राइट टू एजुकेशन के आधार पर भी नियमावली बनी है. हजारीबाग">https://lagatar.in/category/jharkhand/north-chotanagpur-division/hazaribagh/">हजारीबाग
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alt="" width="600" height="400" /> दसवीं की छात्रा फरवीन कहती हैं कि कॉलेज जाने में कम से कम गाड़ी का इंतजार करते-करते दो घंटे का समय चला जाता है. फिर आने में भी दो घंटे का वक्त जाया होता है. ऊपर से 40 से 50 रुपए किराया भी देना पड़ता है. अगर गांव में ही प्लस टू की सुविधा होती, तो पैसे और समय दोनों की बचत होती. इससे घर में पढ़ाई का भी पूरा वक्त मिलता.
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alt="" width="600" height="400" /> पबरा निवासी बीए सेमेस्टर टू की छात्रा सुनैना ने शहर जाकर पढ़ाई करने का अनुभव बताया. उसने कहा कि मॉर्निंग और बारिश में काफी परेशानी होती है. कई बार कॉलेज छूट जाता है. कभी गाड़ी नहीं, तो कभी सवारी नहीं. इसी इंतजार में वक्त जाया होता है.
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प्लस टू स्कूल खुलने से पैसे व समय की होती बचत : फरवीन
alt="" width="600" height="400" /> दसवीं की छात्रा फरवीन कहती हैं कि कॉलेज जाने में कम से कम गाड़ी का इंतजार करते-करते दो घंटे का समय चला जाता है. फिर आने में भी दो घंटे का वक्त जाया होता है. ऊपर से 40 से 50 रुपए किराया भी देना पड़ता है. अगर गांव में ही प्लस टू की सुविधा होती, तो पैसे और समय दोनों की बचत होती. इससे घर में पढ़ाई का भी पूरा वक्त मिलता.
कभी गाड़ी नहीं, कभी सवारी नहीं
alt="" width="600" height="400" /> पबरा निवासी बीए सेमेस्टर टू की छात्रा सुनैना ने शहर जाकर पढ़ाई करने का अनुभव बताया. उसने कहा कि मॉर्निंग और बारिश में काफी परेशानी होती है. कई बार कॉलेज छूट जाता है. कभी गाड़ी नहीं, तो कभी सवारी नहीं. इसी इंतजार में वक्त जाया होता है.
मुखिया समेत ग्रामीणों ने भी की प्लस टू स्कूल खोलने की वकालत
इस संबंध में ग्रामीण ईश्वर प्रसाद मेहता, सरयू राम, मुमताज अंसारी, रंजीत रजक और मुखिया सोनी कुमारी ने भी छात्र-छात्राओं की मांग को जायज बताते हुए प्लस टू स्कूल खुलने की वकालत की. गांव में लगभग 15 हजार की आबादी है. ऐसे में विद्यार्थियों की संख्या भी खासी है.इन क्षेत्र के विद्यार्थियों को होती है परेशानी
पबरा, खुटरा, मायापुर, हेरना, डूकर, धरहरा आदि की छात्र-छात्राओं को पबरा में प्लस टू स्कूल नहीं होने से शहर जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है.शिक्षक भी चाहते हैं खुले प्लस टू स्कूल
इस संबंध में पबरा हाई स्कूल के शिक्षक हेमंत कुमार कहते हैं कि अगर इस क्षेत्र में प्लस टू स्कूल खुल जाए, तो यहां के बच्चों का भविष्य संवर जाएगा. गांव में ही उनकी इंटर की पढ़ाई की सुविधा हो जाएगी. पहले यहां मिडिल स्कूल था. कुछ वर्ष पहले इसे उत्क्रमित कर दसवीं तक की पढ़ाई के लिए हाई स्कूल कर दिया गया. इसे भी पढ़ें : यमुना">https://lagatar.in/delhi-yamuna-river-in-spate-again-water-level-recorded-at-205-96-metres-flood-risk-increased/">यमुनानदी फिर उफान पर, जलस्तर 205.96 मीटर दर्ज, बाढ़ का खतरा बढ़ा [wpse_comments_template]
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