Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

हजारीबाग: कूड़ेवाले शिक्षक की क्लास में दोनों हाथों से लिखते हैं छात्र

Advertisement
Advertisement
Gaurav Prakash Hazaribagh: कभी कूड़ेवाले शिक्षक के नाम से मशहूर महेंद्र कुमार को तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने सम्मानित किया था. उन्हीं शिक्षक की बदौलत आज महज 20 सेकंड में पांचवीं क्लास के नौनिहाल झारखंड के 24 जिलों का नाम धाराप्रवाह बोल सकते हैं. जी हां यह संभव कर दिखाया है हजारीबाग मायापुर प्राथमिक विद्यालय के छात्रों ने. उनकी उपलब्धि के जनक हैं नवाचार के लिए जाने जाने वाले हजारीबाग पगिमल रोड निवासी मायापुर पबरा कटकमसांडी के शिक्षक महेंद्र कुमार. बच्चों में रैपिड लर्निंग एक्टिविटी के जरिए धाराप्रवाह कैसे पढ़ा जाए इसका गुर सिखा रहे हैं. दरअसल कोरोना काल के बाद जब स्कूल खुला, तो छात्रों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी. छात्र पढ़ना भी भूल चुके थे. ऐसे में शिक्षक महेंद्र कुमार ने अपने स्कूल के बच्चों को धाराप्रवाह पढ़ाने के लिए योजना बनाई. बच्चों में बोलने की क्षमता तैयार करने के लिए पहले एक प्रोसेस तैयार किया. फिर छात्रों को प्रैक्टिस कराया और जहां समस्याएं आयीं, उसका समाधान किया और खेल खेल के रूप में रैपिड लर्निंग एक्टिविटी में छात्रों को माहिर कर दिया. उनके विद्यालय के सभी बच्चों में धाराप्रवाह बोलने की महारत हासिल है. बच्चे चंद लम्हों में बड़ी-बड़ी कविताएं और किताब के पन्ने पढ़ लेते हैं .यही नहीं उन्होंने छात्रों को दोनों हाथों से लिखने की विधा सिखा डाली है. शिक्षक महेंद्र कुमार बताते हैं कि हर एक व्यक्ति के पास क्षमता है कि वह एक हाथ से लिख सके. लेकिन उन्होंने छात्रों में उभय हस्त कौशल की विधा से निपुण किया. आज उनके स्कूल के 70% से अधिक बच्चे दोनों हाथों से लिखते हैं. यही नहीं बच्चे एक हाथ से अंग्रेजी दूसरे हाथ से हिंदी लिखते हैं. इससे देख कर पदाधिकारी भी दंग रह जा रहे हैं. दरअसल महेंद्र कुमार का यह प्रयास रहा है कि वह कुछ शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा करें, जिससे छात्रों को लाभ मिले. शिक्षक महेंद्र कुमार को 2018 में झारखंड के तत्कालीन राज्यपाल डॉक्टर द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मान भी मिल चुका है. उन्होंने उस वक्त कचड़े में फेंके गए सर्फ, कुरकुरे के रैपर और चॉकलेट के डिब्बे को किताब का रूप दे दिया था. सर्फ के पैकेट से लेकर कुरकुरे के रैपर, चॉकलेट के डिब्बों को बच्चों को अंग्रेजी सिखाने का जरिया बनाया था. छात्र बहुत ही कम समय में अंग्रेजी बोलना सीख गए थे. वर्ष 2015 में उन्होंने यह प्रयास किया था. इसे भी पढ़ें– आज">https://lagatar.in/cant-criticize-pm-modi-today-danger-of-going-to-jail-said-former-supreme-court-judge/">आज

पीएम मोदी की आलोचना नहीं कर सकते, जेल जाने का खतरा, बोले, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, कानून मंत्री बरसे
यू ट्यूब पर शिक्षक के अभिनव प्रयोग को देखकर उन्हें प्रखंड स्तर पर शिक्षकों ने सम्मानित किया. बाद में शून्य निवेश पर बेहतर शिक्षा के लिए जिले के तत्कालीन डीसी रविशंकर शुक्ला ने सम्मानित किया था. इसके बाद राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया था. शून्य निवेश आधारित शिक्षा में अभिनव प्रयोग कर शिक्षा विभाग के लिए आदर्श स्थापित कर दिया है. इसे भी पढ़ें– आर्थिक">https://lagatar.in/good-news-on-the-economic-front-india-will-be-the-worlds-third-largest-economy-by-2029-sbi-report/">आर्थिक

मोर्चे पर गुड न्यूज, 2029 तक भारत होगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी : एसबीआई की रिपोर्ट
[wpse_comments_template]
Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही