सांसद, विधायक और जिला परिषद अध्यक्ष ने वर्ष 2019 में संयुक्त रूप से किया था उद्घाटन Suraj Kumar Chouparan : चौपारण प्रखंड मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर झारखंड-बिहार के सीमावर्ती इलाके भगहर परसातरी में बने ढाई करोड़ के भवन खंडहर में तब्दील होने लगे हैं. जिला परिषद से बने इस समेकित भवनों में कई सरकारी दफ्तरों को शिफ्ट किया जाना था. लेकिन यहां के सरकारी कार्यालय आज भी किराए में चल रहे हैं और इधर समेकित विकास भवन भी धीरे-धीरे जर्जर हालत में पहुंच गया है. इस भवन को ग्रामीणों ने गोशाला बना दिया है. लोग यहां अपनी गाय बांध रहे हैं. ऐसे में करोड़ों के इस भवन को बनाने के सरकार के उद्देश्य को गहरा आघात लग रहा है. वर्तमान समय में भवन खंडहर बनता जा रहा है. इधर पंचायत की विकास योजनाओं के संचालन तथा यहां काम करनेवाले अधिकारियों व कर्मियों को भी सूचना प्रसारण आदि में परेशानी उठानी पड़ रही है. चूंकि किराए के भवन में कई तरह की असुविधाएं हैं. पंचायत के विकास की समीक्षा के लिए जिला प्रशासन ने उग्रवाद प्रभावित भगहर में दो करोड़ 35 लाख रुपए की लागत से जिला परिषद की अनुशंसा पर समेकित विकास भवन (बहुउद्देश्यीय) का निर्माण कराया था. वर्ष 2019 में 25 अक्तूबर को स्थानीय सांसद जयंत सिन्हा, तत्कालीन विधायक मनोज यादव, तत्कालीन जिला परिषद की अध्यक्ष सुशीला देवी सहित जिला, अनुमंडल तथा स्थानीय प्रशासन ने इसका उद्धाटन किया था. अधिकारियों ने भगहर के ग्रामीणों से कहा था कि पंचायत में संचालित स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र, सरकारी राशन दुकान, प्रखंड और अंचल तथा अन्य विभागों के संचालित कार्यों के लिए बहुउद्देश्यीय भवन बनाया गया है. ग्रामीणों को अब सरकारी अधिकारियों और कर्मियों के लिए गांवों या मुख्यालय में नहीं भटकना पड़ेगा. गांवों की विकास की सभी योजनाओं का संचालन, संरक्षण और देखरेख बहुउद्देश्यीय भवन में संचालित विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा कर्मियों द्वारा किया जाएगा. लेकिन उद्घाटन के चार साल बीत जाने के बाद न तो सरकारी दफ्तर इस बहुउद्देश्यीय भवन में शिफ्ट हुए और न ही अधिकारी और कर्मी यहां बैठ पाए. ग्रामीण जनता के लिए ढाई करोड़ का यह भवन सिर्फ सफेद हाथी बनकर रह गया.
कभी गोलियों की तड़तड़हाट से गूंजता था भगहर
तीन दशक पूर्व भगहर के नाम से ही लोगों की रूह कांप उठती थी. यह इलाका घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता था. यहां अक्सर गोलियों की तड़तड़ाहट सुनी जाती थी. ऐसा लोग कहते थे कि भगहर में माओवादी सरकार चलाते हैं. भगहर जाने के लिए पहाड़ी-जंगल पार करना पड़ता था. फिलहाल भगहर जाने के लिए सड़क बन गई और वहां से मुख्यालय चौपारण तक आवागमन सुचारू और सुगम हो गया.
तीन माह पूर्व डीसी को लिखा था पत्र : मुखिया
भगहर पंचायत के मुखिया कृष्णा रविदास ने जिले के उपायुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को तीन माह पूर्व पत्र लिखकर समेकित भवन की स्थिति की जानकारी दी थी. पंचायत में भवनहीन अस्पताल, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, पीडीएस दुकान सहित अन्य सरकारी स्थानों को बहुउद्देश्यीय भवन में संचालित कराने की मांग की थी. मुखिया ने कहा कि कई सरकारी संस्थान भाड़े की भवन में चल रहे हैं, जबकि करोड़ों रुपए का भवन खंडहर बनता जा रहा है. इस पर मुखिया को डीसी ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही इस समाधान निकाला जाएगा.
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