Search

हजारीबागः फर्जी FIR मामले में अवर सचिव, दो इंस्पेक्टर व GM के खिलाफ वारंट जारी

Hazaribagh : पेयजल एवं जल स्वच्छता विभाग के अवर सचिव कुमुद झा, सेवानिवृत्त डीएसपी अखिलेश सिंह, स्पेशल ब्रांच के इंस्पेक्टर रामदयाल व इंस्पेक्टर अकील अहमद और एनटीपीसी के पूर्व जीएम टी गोपालकृष्ण के खिलाफ हजारीबाग की अदालत ने वारंट जारी किया है. यह वारंट हाई कोर्ट द्वारा पूर्व में जारी स्टे आदेश समाप्त होने के बाद जारी किया गया है. हालांकि इस मामले टी गोपालकृष्ण ने अदालत में हाजिर होकर जमानत ले ली है. 

 

 

जानकारी के मुताबिक मंटू सोनी के परिवादवाद पर हजारीबाग की अदालत ने में सुनवाई चल रही थी. इसी दौरान गोपाल कृष्ण ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले में आगे की कार्रवाई पर स्टे ऑर्डर दिया था.

 

जस्टिस अनिल चौधरी की अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद स्टे आदेश को हटा दिया. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने एनटीपीसी के पूर्व जीएम टी गोपाल कृष्ण पर दो हजार और अवर सचिव (तत्कालीन बीडीओ) कुमुद झा पर एक हजार का जुर्माना लगाया है.

 

हजारीबाग न्यायालय के शिवानी शर्मा की अदालत द्वारा तत्कालीन गढ़वा बीडीओ कुमुद झा, मधुपुर इंस्पेक्टर रामदयाल मुंडा, स्पेशल ब्रांच इंस्पेक्टर अकील अहमद, सेवानिवृत्त डीएसपी अखिलेश सिंह और एनटीपीसी के सेवानिवृत्त जीएम टी गोपाल कृष्ण के खिलाफ समन जारी किया था.

 

आरोप था कि बड़कागांव के चिरुडीह में 17 मई 2016 को हुई घटना में बड़कागांव पुलिस ने तत्कालीन मजिस्ट्रेट वर्तमान गढ़वा बीडीओ का आवेदन बदलकर अन्य लोगों का नाम जोड़ दिया था. यह मामला बड़कागांव थाना की कांड संख्या 135/16 से संबंधित है.

 

हजारीबाग न्यायालय की न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी शिवानी शर्मा की कोर्ट ने तत्कालीन गढ़वा बीडीओ कुमुद झा, मधुपुर इंस्पेक्टर रामदयाल मुंडा, स्पेशल ब्रांच इंस्पेक्टर अकील अहमद, सेवानिवृत्त डीएसपी अखिलेश सिंह, एनटीपीसी के सेवानिवृत्त जीएम टी गोपाल कृष्ण को प्रथम दृष्टया आरोपी मानते हुए समन जारी किया था. सभी आरोपियों को 20 नवंबर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश जारी किया गया था.

 

दायर परिवाद वाद संख्या 1644/22 में सुनवाई में अधिवक्ता अनिरुद्ध कुमार, पवन यादव, रंजन कुमार की दलील और गवाहों को सुनने के बाद कोर्ट ने धारा 166, 166ए,167, 218 और 220 में प्रथम दृष्टया दोषी माना और संज्ञान लेते हुए समन जारी करने का आदेश जारी किया था. प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए सभी आरोपी उस समय बड़कागांव, हजारीबाग में पदस्थापित थे.

 

तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा के आवेदन को बदलकर तत्कालीन थानेदार रामदयाल मुंडा ने बड़कागांव थाना कांड संख्या 135/16 की केस डायरी के पैरा एक में कुमुद झा के हस्तलिखित आवेदन प्राप्त होने की बात लिखी है.

 

जबकि मूल एफआईआर कॉपी टाइप किया हुआ है. थानेदार की इस गड़बड़ी की पुष्टि करते हुए कुमुद झा ने कोर्ट में बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि उनके आवेदन को बदलकर थानेदार ने अपने मुंशी से टाइप करवाकर एफआईआर दर्ज की है.

 

कुमुद झा के आवेदन में दो लोगों के नाम थे. थानेदार ने 29 अन्य लोगों का नाम जोड़ दिया था. एफआईआर कॉपी और कोर्ट में कुमुद झा का सिग्नेचर अलग-अलग है. एफआईआर कॉपी व डेट लिखावट कोर्ट में किए सिग्नेचर और डेट लिखावट में फर्क है.

 

इस प्रकरण में मंटू सोनी ने हजारीबाग सदर सीजीएम ऋचा श्रीवास्तव की अदालत में परिवादवाद दायर किया था, जिसे ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शिवानी शर्मा की कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था. वर्तमान में विवेक कुमार की अदालत में मामले सुनवाई चालू हो गई है.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp