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नामकुम से जमीन रिकॉर्ड गायब होने के मामले में ACB जांच पर दो सप्ताह में फैसला करें : HC

Ranchi: रांची के नामकुम अंचल क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री और राजस्व दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी और जमीन रिकॉर्ड गायब होने से संबंधित अवमानना याचिका  पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की कोर्ट ने झारखंड के प्रिंसिपल सेक्रेटरी कैबिनेट विजिलेंस डिपार्मेंट को मामले में प्रतिवादी बनाया है.
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Ranchi: रांची के नामकुम अंचल क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री और राजस्व दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी और जमीन रिकॉर्ड गायब होने से संबंधित अवमानना याचिका  पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की कोर्ट ने झारखंड के प्रिंसिपल सेक्रेटरी कैबिनेट विजिलेंस डिपार्मेंट को मामले में प्रतिवादी बनाया है. 


कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया है कि एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की ओर से इस मामले में प्रारंभिक जांच (PE) कराने के संबंध में मांगी गई अनुमति पर दो सप्ताह में निर्णय लें. निर्णय लेकर जल्द एसीबी को सूचित करें. इससे पहले एसीबी की ओर से सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने कोर्ट को बताया कि नामकुम अंचल की जमीन रिकॉर्ड गड़बड़ी और रिकॉर्ड के गायब होने से संबंधित केस प्रथम दृष्टतया एसीबी के पास आया है, इस संदर्भ में पीई दर्ज करने को लेकर सरकार से अनुमति मांगी गई है. 

 

कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई निर्धारित की है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नामकुम अंचल की जमीन रिकॉर्ड गड़बड़ी और रिकॉर्ड के गायब के संबंध में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से प्रारंभिक जांच (पीई) के संबंध में वस्तु स्थिति बताने को कहा था. एसीबी से पीई से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था. 


दरअसल  यह मामला गायब दस्तावेजों और म्यूटेशन में गड़बड़ी से संबंधित है. जिसमें प्रार्थी थॉमस साइमन ने अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि नामकुम अंचल कार्यालय में एक दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के प्रकरण में भारी गड़बड़ी की गई है और जांच के लिए मांगने पर भी मूल राजस्व अभिलेख (मूल रिकॉर्ड) उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं. 

 

विवादित भूमि नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र में स्थित है. हालांकि पूर्व की सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात आई थी कि नामकुम अंचल कार्यालय दूसरे पक्षकार के पक्ष में किए गए म्यूटेशन की सर्टिफाइड कॉपी (प्रमाणित प्रति) देने में लगातार टालमटोल कर रहा था. इस संबंध में हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में प्रार्थी के पक्ष में स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद अंचल अधिकारियों ने उसका अनुपालन नहीं किया था. 


दरअसल  हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया सरकारी रिकॉर्ड में की गई इस अनियमितता को अत्यंत गंभीर माना था. कोर्ट ने जांच एजेंसी एसीबी को पूरे प्रकरण की जांच का जिम्मा सौंपा है.

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