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HC का निर्देश- हजारीबाग-बरही सड़क किनारे लगाए गए 20 हजार पेड़ के दावे पर स्थल निरीक्षण करें RCCF

झारखंड हाईकोर्ट ने एनएचएआई द्वारा हजारीबाग- बरही सड़क (एनएच 33) के किनारे लगाए गए 20 हजार पेड़ के संबंध में हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष सह रीजनल चीफ कंजरवेटर ऑफ फारेस्ट (आरसीसीएफ) रांची को स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा है.
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  • DALSA हजारीबाग के सचिव की रिपोर्ट पर एनएचएआई की टिप्पणी को कोर्ट ने नकारा
  • एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और आरसीसीएफ रांची हुए हाजिर
  • एनएचएआई के रीजनल ऑफिसर और आरसीसीएफ, रांची से मांगा जवाब

Ranchi:  झारखंड हाईकोर्ट ने एनएचएआई द्वारा हजारीबाग- बरही सड़क (एनएच 33) के किनारे लगाए गए 20 हजार पेड़ के संबंध में हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष सह रीजनल चीफ कंजरवेटर ऑफ फारेस्ट (आरसीसीएफ) रांची को स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा है.

 

कोर्ट ने मामले में एनएचएआई के रीजनल ऑफिसर से भी हजारीबाग- बरही सड़क के किनारे पेड़ों के संरक्षण और वहां ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करने को लेकर की गई कार्रवाई के संबंध में भी रिपोर्ट मांगी है.

 

इससे पहले एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने DALSA सचिव हजारीबाग के सचिव की रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि पेड़ों की गिनती करने में कुछ गलती हुई है. जिसपर कोर्ट ने एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर की दलील को नकार दिया. सुनवाई के दौरान एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष सह आरसीसीएफ रांची कोर्ट में हाजिर हुए.

 

हजारीबाग- बरही (एनएच 33) सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ों की कटाई के मामले में कोर्ट के स्वत: संज्ञान की सुनवाई गुरुवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ में हुई. अब अगली सुनवाई 25 जून को होगी. 

 

दरअसल, DALSA हजारीबाग के सचिव की रिपोर्ट को एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने गलत बताया. कोर्ट ने पूर्व के अपने आदेश में DALSA सचिव से एनएचएआई के हजारीबाग एनएच के किनारे 20 हजार पौधे लगाए जाने के उनके दावे पर रिपोर्ट मांगी थी. जिसपर DALSA सचिव ने अपनी रिपोर्ट में उस दावे को सही नहीं बताया था और कहा था कि कई पौधे जल और देखभाल के अभाव में मर चुके हैं. सुनवाई के दौरान कोर्ट में एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और आरसीसीएफ रांची हाजिर हुए. 

 

यहां बता दें कि पूर्व की सुनवाई में एनएचएआई ने कोर्ट को बताया था कि हजारीबाग- बरही सड़क के किनारे 20 हजार पौधे लगाए गए हैं जिन पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च आया है. मामले में एमिकस क्यूरी की ओर से बताया गया था कि एनएचएआई वैसे पौधों को भी जोड़ रहा है जो जंगली पौधे हैं जो खुद से उग जाते हैं. हकीकत में इतने पौधे नहीं लगाए गए हैं.

 

एनएचएआई द्वारा पौधे तो लगा दिए जाते हैं लेकिन उसका रखरखाव नहीं किया जाता है जिससे पौधे सूख जाते हैं. एनएचएआई की पॉलिसी के तहत इसके रखरखाव में एनजीओ एवं स्थानीय लोगों को भी शामिल करना है लेकिन इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है. पीपल, महुआ जैसे पौधों को लगाने से स्थानीय निवासी भी इस पेड़ की रक्षा करेंगे और काटेंगे नहीं. पेड़-पौधों को बचाने की जिम्मेवारी स्थानीय लोगों को दी जा सकती है.

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