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HC ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद से जुड़ी याचिका को PIL के साथ टैग करने का दिया निर्देश

  • जेएसएससी के 23 अप्रैल के नोटिस को दी गई है चुनौती
  • प्रार्थियों को किसी तरह की अंतरिम राहत नहीं दी गई
  • 2819 अभ्यर्थियों को 8 मई को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का दिया है निर्देश

Ranchi: माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद से संबंधित अर्चना कुमारी एवं अन्य की याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) का पक्ष सुनने के बाद इस मामले को इससे संबंधित जनहित याचिका (PIL 2375/ 2024) के साथ संलग्न (टैग) कर हाईकोर्ट की खंडपीठ में सुनवाई करने का निर्देश दिया.

 

इससे पहले जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने कोर्ट को बताया कि प्रार्थियों ने इस याचिका में जो मूल बातें कही है उसी से संबंधित तालेश्वर महतो की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की खंडपीठ में सुनवाई चल रही है. 

 

खंडपीठ इस मामले की मॉनिटरिंग कर रही है. ऐसे में दो कोर्ट में एक ही तरह के मामले को चलाना उचित नहीं है.  इस याचिका में जो प्रार्थियों का मूल प्रार्थना है वह जनहित याचिका में भी है. जनहित याचिका में 50 से अधिक अभ्यर्थियों ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर जेएसएससी के आंसर शीट दिखाने ताकि वह मॉडल आंसर के विरुद्ध आपत्ति दे सकें, का आग्रह किया है.  

 

कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद अर्चना कुमारी एवं अन्य के मामले को खंडपीठ में उक्त जनहित याचिका के साथ संलग्न कर सुनवाई करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने प्रार्थियों को किसी तरह की अंतरिम राहत नहीं दी. 
 

दरअसल, अर्चना कुमारी एवं अन्य अभ्यर्थियों ने मामले में रिट याचिका दायर की है. जिसमें मूल आग्रह में जेएसएससी को मॉडल आंसर दिखाने का आदेश देने का आग्रह किया है ताकि वह मॉडल आंसर के विरुद्ध आपत्ति दे सके.

 

वहीं, संशोधन पिटीशन के माध्यम से प्रार्थियों ने इस रिट याचिका में जेएसएससी द्वारा जारी 23 अप्रैल 2026 को जारी नोटिस को चुनौती दी है. नोटिस के जरिए जेएसएससी ने 2819 अभ्यर्थियों, जिनमें 20 प्रार्थी भी शामिल हैं, को 08.05.2026 को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया है.

 

उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया था कि बिना परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों की पहचान किए और बिना दोषी अभ्यर्थियों को चिन्हित किए, सभी 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना अवैध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है. 

 

प्रार्थी किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों (unfair means) में शामिल नहीं रहे हैं, लेकिन उन्हें भी दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है. आयोग को पहले कथित अनियमितताओं में शामिल परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों और संबंधित अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, न कि सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से परेशान करना चाहिए.

 

वहीं, जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने कोर्ट को बताया कि इस परीक्षा में 25 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे. केवल 2819 अभ्यर्थी जिनमें प्रार्थी भी शामिल है, के एग्जामिनेशन टर्मिनल में बाहरी हस्तक्षेप के साक्ष्य मिले हैं जिसके कारण इनके पुनर्परीक्षा का निर्णय लिया गया.

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